क्या AI बन सकता है अगला आइंस्टीन? वैज्ञानिक ब्रायन ग्रीन ने दिया जवाब
क्या कभी इंसानी रचनात्मकता की इस सीमा को पार कर पाएगा AI ?
क्या AI अगला आइंस्टीन या न्यूटन बन सकता है? जानें वैज्ञानिक ब्रायन ग्रीन के अनुसार AI की वैज्ञानिक रचनात्मकता कितनी आगे पहुंच चुकी है और इंसानों से उसका फर्क क्या है.
AI News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से इंसानों के काम करने और सोचने के तरीके को बदल रहा है. आज AI किताबें पढ़ सकता है, वैज्ञानिक शोध का विश्लेषण कर सकता है, जटिल समीकरणों को समझ सकता है और अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी को एक साथ जोड़ सकता है. ऐसे में एक बड़ा सवाल उठने लगा है- क्या भविष्य में AI अगला अल्बर्ट आइंस्टीन या आइजैक न्यूटन बन सकता है?
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के जाने-माने भौतिक विज्ञानी ब्रायन ग्रीन का मानना है कि भविष्य में ऐसा संभव हो सकता है. उन्होंने Steven Bartlett के पॉडकास्ट The Diary Of A CEO में इस सवाल पर अपनी राय रखी. ग्रीन के मुताबिक, अगर किसी मशीन के पास इंसानों द्वारा अब तक तैयार किया गया लगभग पूरा ज्ञान उपलब्ध हो, तो उसके पास वैज्ञानिक खोजों के मामले में इंसानों से आगे निकलने की बड़ी क्षमता हो सकती है.
हालांकि, वैज्ञानिक रचनात्मकता केवल जानकारी इकट्ठा करने तक सीमित नहीं है. ब्रायन ग्रीन ने वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता को तीन अलग-अलग स्तरों में समझाया है. इनमें से शुरुआती दो स्तरों पर AI पहले ही काफी मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है, जबकि तीसरा स्तर अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
पहला स्तर- ज्यादा विकल्पों को देख पाना
वैज्ञानिक खोज में पहला महत्वपूर्ण कदम होता है किसी समस्या के संभावित समाधान को पहचानना. इसे शतरंज के उदाहरण से समझा जा सकता है. एक अनुभवी खिलाड़ी बोर्ड पर मौजूद ज्यादा संभावित चालों को देख सकता है और उनमें से बेहतर चाल चुन सकता है.
वैज्ञानिक शोध में भी कुछ ऐसा ही होता है. एक अनुभवी वैज्ञानिक किसी समस्या को हल करने के लिए कई संभावित समीकरणों, सिद्धांतों और विचारों को एक साथ ध्यान में रख सकता है.
AI के पास यहां एक बड़ा फायदा है. उसे बड़ी संख्या में प्रकाशित शोधपत्रों, किताबों, समीकरणों और वैज्ञानिक विचारों से प्रशिक्षित किया जा सकता है. ऐसे में AI के पास एक इंसान की तुलना में कहीं ज्यादा जानकारी को एक साथ देखने और उसका विश्लेषण करने की क्षमता होती है.
मसलन, दो अलग-अलग वैज्ञानिक शोधों के बीच कोई संबंध किसी इंसान की नजर से छूट सकता है, क्योंकि उसने दोनों क्षेत्रों की जानकारी नहीं पढ़ी हो. लेकिन AI दोनों क्षेत्रों की जानकारी एक साथ प्रोसेस कर सकता है और उनके बीच संभावित संबंध तलाश सकता है.
दूसरा स्तर- अलग-अलग विचारों को जोड़ना
वैज्ञानिक रचनात्मकता का अगला और ज्यादा चुनौतीपूर्ण स्तर है- दो ऐसे विचारों को जोड़ना, जिन्हें पहले किसी ने एक साथ नहीं देखा हो.
सिर्फ बहुत सारी जानकारी होना इसके लिए पर्याप्त नहीं है. जरूरी यह है कि AI अलग-अलग क्षेत्रों के विचारों के बीच नया संबंध बना सके.
आइंस्टीन का General Relativity यानी सामान्य सापेक्षता सिद्धांत इसका एक शानदार उदाहरण है. इस सिद्धांत को विकसित करने में गणित के एक क्षेत्र Riemannian Geometry की महत्वपूर्ण भूमिका रही. यह गणितीय अवधारणा मुड़े हुए या वक्र स्थान को समझने का तरीका देती थी.
दूसरी ओर, न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियम बताते थे कि वस्तुएं एक-दूसरे को कैसे आकर्षित करती हैं. आइंस्टीन ने इन अलग-अलग विचारों को एक नए तरीके से जोड़ा और गुरुत्वाकर्षण को Space-Time के मुड़ने के रूप में समझाने वाला सिद्धांत विकसित किया.
ब्रायन ग्रीन का मानना है कि AI इस तरह के काम में भी इंसानों को चुनौती दे सकता है. AI के पास अलग-अलग वैज्ञानिक क्षेत्रों से जुड़ी बहुत बड़ी मात्रा में जानकारी होती है. इसलिए वह ऐसे क्षेत्रों के बीच संबंध तलाश सकता है, जिन्हें कोई एक व्यक्ति शायद कभी एक साथ देखने के बारे में न सोचे.
लेकिन तीसरा स्तर अभी भी AI के लिए बड़ी चुनौती
वैज्ञानिक रचनात्मकता का तीसरा स्तर सबसे कठिन है. यहां सवाल किसी पुराने ज्ञान को जोड़ने का नहीं, बल्कि ऐसा विचार पैदा करने का है, जिसका पहले कोई उदाहरण ही मौजूद न हो.
यहीं AI की मौजूदा सीमाएं सामने आती हैं.
AI मुख्य रूप से उन पैटर्न और जानकारी से सीखता है, जो पहले से मौजूद हैं. वह पुराने ज्ञान का विश्लेषण करके नए संयोजन और संभावित समाधान तैयार कर सकता है. लेकिन अगर कोई विचार पूरी तरह नया है और उसका कोई पूर्व उदाहरण या पैटर्न मौजूद नहीं है, तो AI के लिए उसे पैदा करना ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
ब्रायन ग्रीन के मुताबिक, इंसानों की ऐसी रचनात्मक छलांग, जो पूरी तरह पुराने ज्ञान से अलग हो, फिलहाल AI से अलग नजर आती है.
क्या AI कभी इंसानी रचनात्मकता की इस सीमा को पार कर पाएगा?
दिलचस्प बात यह है कि ब्रायन ग्रीन इसे AI की स्थायी सीमा नहीं मानते. उनसे जब पूछा गया कि क्या भविष्य में AI ऐसी रचनात्मक क्षमता हासिल कर सकता है, जिसे आज इंसानों की खासियत माना जाता है, तो उनका जवाब सकारात्मक था.
ग्रीन का मानना है कि पर्याप्त समय मिलने पर AI इस स्तर तक पहुंच सकता है. उन्होंने अभी तक किसी मशीन को इस सीमा को पार करते हुए नहीं देखा है, लेकिन उन्हें यह भी नहीं लगता कि यह अंतर हमेशा बना रहेगा.
यानी असली सवाल यह नहीं है कि AI ऐसा कर सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि AI ऐसा कब कर पाएगा.
AI बनाम इंसान की वैज्ञानिक सोच की असली परीक्षा
फिलहाल वैज्ञानिक रचनात्मकता के तीन स्तरों में से दो में AI तेजी से मजबूत हो रहा है. पहला है- उपलब्ध ज्ञान और संभावनाओं को बड़े स्तर पर देखना. दूसरा है- अलग-अलग मौजूदा विचारों को जोड़कर नए समाधान तैयार करना.
तीसरा स्तर अभी ज्यादा कठिन है- ऐसा विचार पैदा करना जिसका कोई पिछला आधार ही न हो.
यही वह क्षेत्र है, जहां इंसानी वैज्ञानिकों की मौलिक सोच अब भी AI से अलग नजर आती है. लेकिन AI जिस तेजी से विकसित हो रहा है, उसे देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि यह अंतर कितने समय तक बना रहेगा.
क्या आने वाले वर्षों में कोई AI सिस्टम ऐसा वैज्ञानिक सिद्धांत पेश कर सकता है, जिसे इंसान कभी सोच भी नहीं पाए? इसका जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है. लेकिन AI और वैज्ञानिक खोज के बीच बढ़ता संबंध यह संकेत जरूर दे रहा है कि अगली बड़ी वैज्ञानिक खोज में इंसान के साथ एक मशीन भी अहम भूमिका निभा सकती है.
FAQs
AI भविष्य में वैज्ञानिक खोजों में बड़ी भूमिका निभा सकता है. भौतिक विज्ञानी ब्रायन ग्रीन के अनुसार, ऐसा कोई स्पष्ट कारण नहीं है कि भविष्य में AI इंसानों जैसी या उससे आगे की वैज्ञानिक रचनात्मकता हासिल न कर सके.
AI एक साथ बड़ी मात्रा में वैज्ञानिक शोध, समीकरण और विचारों का विश्लेषण कर सकता है. इससे वह अलग-अलग क्षेत्रों की मौजूदा अवधारणाओं के बीच ऐसे संबंध खोज सकता है, जिन्हें कोई एक इंसान शायद नहीं देख पाए.
AI मौजूदा ज्ञान और पैटर्न के आधार पर नए विचारों को जोड़ने में सक्षम है, लेकिन ऐसी बिल्कुल नई अवधारणा तैयार करना, जिसका कोई पिछला उदाहरण या पैटर्न मौजूद न हो, अभी भी इंसानी रचनात्मकता का क्षेत्र माना जाता है. हालांकि, भविष्य में AI इस सीमा को पार कर पाएगा या नहीं, यह अभी खुला सवाल है.
ये भी पढ़ें: AI अब खुद लिख रहा है Software का Code, इंसानों का काम बदल रहा है, जानिए क्या है नया बदलाव
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए