क्या अगले iPhone की कीमतें 20% तक बढ़ सकती हैं? जानिए असली वजह

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ऐपल आईफोन की फाइल फोटो एक्स से

Apple के नए iPhone की कीमतों में 20% तक की बढ़ोतरी की अटकलें लगाई जा रही हैं. जानिए सेमीकंडक्टर चिप्स की किल्लत, बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग लागत और प्रीमियम ब्रांड वैल्यू जैसी वजहें क्यों हैं जिम्मेदार.

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टेक की दुनिया में हमेशा से यह सवाल बना रहता है कि Apple अपने नए iPhone मॉडल की कीमत क्या रखेगा. लेकिन इस बार कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले iPhone की कीमतें 20% तक बढ़ सकती हैं. यह बढ़ोतरी उन ग्राहकों को झटका दे सकती है जो हर साल नए iPhone का इंतजार करते हैं. लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. इसके पीछे कई बड़ी वजहें हैं जो सीधे तौर पर ग्लोबल सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट से जुड़ी हैं.

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कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे की वजहें

Apple दुनिया भर में अपने प्रोडक्ट्स की क्वालिटी और परफॉरमेंस के लिए जाना जाता है, लेकिन इन सब के पीछे एक बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट होती है. पिछले कुछ समय से दुनिया भर में सेमीकंडक्टर चिप्स की किल्लत बनी हुई है. यह किल्लत सिर्फ मोबाइल्स तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कार इंडस्ट्री से लेकर अन्य टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स को भी प्रभावित कर रही है. iPhone भी चिप्स पर बहुत अधिक निर्भर करता है.

1. सेमीकंडक्टर चिप्स की बढ़ती मांग और सप्लाई की समस्या

कोरोना महामारी के बाद से दुनिया भर में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का दौर तेजी से आया है. लोग घर से काम कर रहे हैं, ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं और मनोरंजन के लिए भी गैजेट्स का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं. इस वजह से कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट और स्मार्टफोन की डिमांड एकदम से बढ़ गई है. लेकिन इन डिवाइसेस को बनाने वाली सेमीकंडक्टर चिप्स की सप्लाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाई.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों (fabs) की क्षमता सीमित है और नई फैक्ट्रियां लगाने में सालों का समय और भारी इन्वेस्टमेंट लगता है. इसी बीच, कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां, जिनमें Apple भी शामिल है, अपने नए मॉडल्स के लिए अधिक से अधिक चिप्स ऑर्डर कर रही हैं. इस जबरदस्त मांग और सीमित सप्लाई की वजह से चिप्स की कीमतें आसमान छू रही हैं. Apple को अपने लेटेस्ट iPhones के लिए जरूरी चिप्स खरीदने में अधिक से अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, जिसका सीधा असर प्रोडक्शन कॉस्ट पर पड़ रहा है.

2. मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी

सिर्फ चिप्स ही नहीं, बल्कि ऐपल आईफोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले अन्य पुर्जे और कंपोनेंट्स की कीमतें भी बढ़ी हैं. डिस्प्ले, कैमरा सेंसर, बैट्री और यहां तक कि पैकजिंग मटेरियल की कीमतें भी ग्लोबल इन्फ्लेशन (महंगाई) और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण बढ़ी हैं.

  • लेबर कॉस्ट: दुनिया के कई देशों में लेबर कॉस्ट भी लगातार बढ़ रही है. Apple अपने प्रोडक्ट्स को जिन देशों में असेंबल करवाता है, वहां मजदूरी की दरें बढ़ी हैं, जिसका सीधा असर प्रोडक्ट की फाइनल कीमत पर पड़ता है.
  • लॉजिस्टिक्स और शिपिंग: ग्लोबल शिपिंग और लॉजिस्टिक्स की कीमतें भी बहुत बढ़ गई हैं. एक देश से दूसरे देश तक सामान पहुंचाने में पहले के मुकाबले अधिक खर्च आ रहा है. इस बढ़ी हुई लागत को भी कंपनियां प्रोडक्ट की कीमत में जोड़ रही हैं.

3. स्ट्रैटेजिक प्राइसिंग और प्रीमियम ब्रांड वैल्यू

Apple हमेशा से एक प्रीमियम ब्रांड रहा है और वह अपने प्रोडक्ट्स के लिए प्रीमियम कीमत वसूलने से कतराता नहीं है. iPhone को सिर्फ एक मोबाइल फोन के तौर पर नहीं, बल्कि एक स्टेटस सिंबल के तौर पर भी देखा जाता है. इस ब्रांड वैल्यू को बनाए रखने के लिए Apple अक्सर अपने नए मॉडल्स को थोड़ा महंगा रखता है, भले ही प्रोडक्शन कॉस्ट में बहुत अधिक बढ़ोतरी न हुई हो.

हालांकि, इस बार प्रोडक्शन कॉस्ट में आ रही वास्तविक बढ़ोतरी को देखते हुए, 20% तक की बढ़ोतरी की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर कंज्यूमर्स को प्रभावित करेगी, खासकर उन बाजरों में जहां iPhone की डिमांड बहुत ज़्यादा है, जैसे भारत.

क्या भारत पर होगा असर?

भारत, iPhone के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण बाजार है. यहां बड़ी संख्या में लोग हर साल नए iPhone खरीदते हैं. अगर कीमतों में 20% तक की बढ़ोतरी होती है, तो यह भारतीय ग्राहकों के लिए एक बड़ा झटका होगा.

  • उदाहरण के लिए: अगर iPhone 15 Pro की कीमत मान लीजिए 1,30,000 रुपये है, तो 20% की बढ़ोतरी के बाद यह लगभग 1,56,000 रुपये तक पहुंच सकती है. यह एक काफी बड़ा इजाफा है.
  • कंपटीशन पर असर: इस बढ़ोतरी का असर दूसरे स्मार्टफोन ब्रांड्स पर भी पड़ सकता है, जो Apple के साथ कॉम्पिटिशन में हैं. हो सकता है कि कुछ ग्राहक प्रीमियम Android फोन्स की तरफ रुख करें.

भविष्य की राह क्या होगी?

Apple के लिए यह एक मुश्किल दौर है. उन्हें अपनी प्रोडक्शन कॉस्ट को कंट्रोल करने और साथ ही अपने ब्रांड वैल्यू और ग्राहक बेस को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना होगा. कंपनी अपनी सप्लाई चेन को और मजबूत करने और अल्टरनेटिव सप्लायर्स तलाशने पर काम कर रही होगी. लेकिन निकट भविष्य में, ग्राहकों को नए iPhone के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ सकती है.

यह देखना दिलचस्प होगा कि Apple इस स्थिति से कैसे निपटता है और क्या वह कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालता है या कुछ हद तक खुद उठाता है. फिलहाल, बाजार में यह चर्चा जोरों पर है और नए iPhone के लॉन्च का इंतजार कर रहे लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि उनकी जेब पर कितना असर पड़ने वाला है.

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