जिला परिषद उपाध्यक्ष पद को लेकर तृणमूल में गुटबाजी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Dec 2016 1:58 AM

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मालदा: मालदा जिला परिषद के उपाध्यक्ष पद के लिए फिर तृणमल में गुटबाजी शुरू हो गयी है. 19 दिसंबर को मालदा जिला परिषद के उपाध्यक्ष का चयन होगा और स्थायी समिति का गठन होगा. इससे पूर्व उपाध्यक्ष पद को लेकर पार्टी के भीतर जोरदार लड़ाई छिड़ गयी है. इस पद के लिए दो लोग दावेदार […]

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मालदा: मालदा जिला परिषद के उपाध्यक्ष पद के लिए फिर तृणमल में गुटबाजी शुरू हो गयी है. 19 दिसंबर को मालदा जिला परिषद के उपाध्यक्ष का चयन होगा और स्थायी समिति का गठन होगा. इससे पूर्व उपाध्यक्ष पद को लेकर पार्टी के भीतर जोरदार लड़ाई छिड़ गयी है. इस पद के लिए दो लोग दावेदार हैं. एक हैं मानिकचक से जीतकर आनेवाले गौड़चंद्र मंडल. और दूसरे हैं, इंगलिशबाजार इलाके से तीन बार निर्वाचित सदस्य उज्ज्वल चौधरी. दल का बड़ा हिस्सा उज्ज्वल चौधरी को उपाध्यक्ष पद पर देखना चाहता है.

जिला परिषद में कांग्रेस के सत्ता में रहने के समय उज्ज्वल चौधरी तीन साल तक अध्यक्ष रहे थे. अध्यक्ष पद पर रहते हुए ही वह तृणमूल में शामिल हो गये थे. पंचायत चुनाव के समय उज्ज्वल चौधरी जिला परिषद में तृणमूल के दल नेता थे. लेकिन दो नाम सामने आने की वजह से जिला नेतृत्व अभी कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है. इससे पूर्व कोलकाता में जिला परिषद सदस्यों को लेकर तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष सुब्रत बक्सी और मंत्री तथा मालदा जिले के पार्टी पर्यवेक्षक शुभेंदु अधिकारी ने बैठक की थी. इस बैठक में शीर्ष नेतृत्व ने बता दिया कि कर्मकर्ता का निर्वाचन पार्टी ही करेगी. गत सोमवार को मालदा जिला परिषद के उपाध्यक्ष चयन और स्थायी समिति के गठन को लेकर निर्वाचित सदस्यों की बैठक तृणमूल के जिला अध्यक्ष मोअज्ज्म हुसेन ने बुलायी थी. लेकिन उस बैठक में सदस्य एकमत पर नहीं पहुंच पाये. नतीजतन फिर जिला नेतृत्व को शीर्ष नेतृत्व के दरवाजे पर पहुंचना पड़ा.

जिला तृणमूल के एक नेता ने कहा कि उपाध्यक्ष पद को लेकर इतनी खींचतान की जरूरत नहीं है. गौड़ मंडल को इस पद पर राज्य नेतृत्व नहीं चाहता है. मीटिंग में यह बात उन्हें बता दी गयी है. इसके बाद जिला नेतृत्व क्यों मामले को झुला रहा है, यह समझ में नहीं आ रहा है. सभी जानते हैं कि गौड़चंद्र मंडल के कामकाज को लेकर राज्य नेतृत्व खुश नहीं है. मानिकचक में सावित्री मित्र की हार के पीछे उनका अंतर्घात था. यहां तक कि सावित्री मित्र को हराने के लिए गौड़चंद्र मंडल ने कोतवाली में अपना आदमी भेजकर कांग्रेस का टिकट भी मांगा था. लेकिन कोतवाली ने गौड़चंद्र पर भरोसा नहीं किया और उन्हें टिकट नहीं दिया. इस तरह दो नौकाओं पर सवार रहनेवाले गौड़चंद्र मंडल को उपाध्यक्ष कैसे बनाया जा सकता है.

तृणमूल के जिला अध्यक्ष मोअज्जम हुसेन ने कहा कि उपाध्यक्ष पद को लेकर कोई विवाद नहीं है. कई लोगों का नाम सामने आया है, जिस पर चर्चा चल रही है. 19 दिसंबर से पहले यह तय कर लिया जायेगा कि कौन जिला परिषद का उपाध्यक्ष होगा और कौन कर्माध्यक्ष.
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