डंकन्स के चाय बागान में फिर एक श्रमिक की मौत

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जलपाईगुड़ी. डंकन्स ग्रुप के निष्क्रिय पड़े नागेश्वरी चाय बागान में एक श्रमिक की मृत्यु हो गयी है. नागेश्वरी चाय बागान के तेतुल लाइन निवासी पचास वर्षीय यहूरन नायक की मौत चिकित्सा ना होने की वजह से उसके घर में ही हो गयी. इसके अलावा बागान के दो नंबर लाइन के निवासी एक चाय श्रमिक के […]

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जलपाईगुड़ी. डंकन्स ग्रुप के निष्क्रिय पड़े नागेश्वरी चाय बागान में एक श्रमिक की मृत्यु हो गयी है. नागेश्वरी चाय बागान के तेतुल लाइन निवासी पचास वर्षीय यहूरन नायक की मौत चिकित्सा ना होने की वजह से उसके घर में ही हो गयी. इसके अलावा बागान के दो नंबर लाइन के निवासी एक चाय श्रमिक के बड़े भाई बेंजामिन मुंडा (61) की भी मृत्यु हो गयी.

पिछले दिनों डंकन्स समूह के ही बागराकोट बागान में कई मजदूरों की मौत हुई थी. इसके बाद पूरा शासन-प्रशासन हरकत में आ गया था. लेकिन अब इसी समूह के नागेश्वरी बागान में श्रमिक की मृत्यु होने से सरकार द्वारा उठाये गये कदमों पर सवालिया निशान लग गया है.

नागेश्वरी चाय बागान के श्रमिकों का आरोप है कि बागान खुला रहने के बावजूद भी कई महीनों से श्रमिकों को मजदूरी, राशन आदि बागान की ओर से नहीं दिया जा रहा है. तकनीकी रूप से बागान बंद नहीं है, लेकिन वह निष्क्रिय अवस्था में पड़ा है. श्रमिकों का कहना है कि सरकार की ओर से दो रुपये प्रतिकिलो की दर से पांच किलो चावल एवं दो-तीन किलो गेहूं प्रत्येक महीने दिया जा रहा है, लेकिन एक परिवार के लिये इतनी खाद्य सामग्री महीने भर के लिए काफी नहीं हैं. जितना राशन सरकार की ओर से मुहैया करायी जा रहा है उतने में एक श्रमिक परिवार मुश्किल से 10 दिन भोजन कर पाता है.

गौरतलब है कि राज्य के खाद्यमंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने स्वयं जाकर नागेश्वरी चाय बागान में श्रमिकों के बीच सरकार द्वारा प्रदत्त राशन सामग्री का वितरण किया था, ताकि बागान में किसी भी श्रमिक की मौत भुखमरी से ना हो. लेकिन यहूरन नायक व बेंजामिन मुंडा काफी दिनों से तपेदिक रोग (टीबी) से ग्रसित थे.

सरकार की ओर से इन दोनों की चिकित्सा भी चल रही थी. जिला मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी प्रकाश मृधा ने बताया कि दोनों की मौत चिकित्साधीन अवस्था में हुई. बागान के श्रमिकों का कहना है कि दोनों तपेदिक रोग से ग्रस्त थे एवं सरकारी चिकित्सा भी चल रही था, लेकिन इस अवस्था में जिस मात्रा में इन लोगों को पौष्टिक खाने की आवश्यकता थी वो नहीं मिल पा रहा था. रुपये के अभाव में ये दोनों भरती होने के लिए अस्पताल भी नहीं जा पा रहे थे. बेंजामिन मुंडा भिक्षा मांग कर अपना व परिवार का गुजारा कर रहे थे. रुपये के अभाव की वजह से वह पेशे से चाय श्रमिक भाई के पास रहते थे. श्रमिकों का आरोप है कि धनाभाव में उचित भोजन व चिकित्सा ना मिल पाने की वजह से दोनों व्यक्तियों की मौत हुई है.

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