प्रधानों के चुनाव के दौरान वाम-तृणमूल संघर्ष
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सियासत. 10 पंचायतों में वामो, 6 में तृणमूल और 4 में कांग्रेस ने किया बोर्ड गठन सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी महकमा परिषद के बोर्ड गठन की प्रक्रिया के तहत शनिवार को 22 ग्राम पंचायतों के प्रधान व उप प्रधान का चुनाव हुआ. इस दौरान कई जगहों पर वाम मोरचा व तृणमूल कांग्रेस के बीच संघर्ष हुआ. इस […]
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सियासत. 10 पंचायतों में वामो, 6 में तृणमूल और 4 में कांग्रेस ने किया बोर्ड गठन
सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी महकमा परिषद के बोर्ड गठन की प्रक्रिया के तहत शनिवार को 22 ग्राम पंचायतों के प्रधान व उप प्रधान का चुनाव हुआ. इस दौरान कई जगहों पर वाम मोरचा व तृणमूल कांग्रेस के बीच संघर्ष हुआ. इस टकराव के चलते हाथीघीसा और रानीगंज पानीशाला नामक दो ग्राम पंचायतों में बोर्ड गठन नहीं हो सका. जिन 20 पंचायतों में बोर्ड गठन हुआ, उनमें से 10 पर वाम मोरचा, 6 पर तृणमूल और 4 पर कांग्रेस काबिज होने में सफल रही.
सिलीगुड़ी महकमा परिषद के त्रिस्तरीय चुनाव परिणाम सात अक्तूबर को घोषित हुए थे, लेकिन अब जाकर पंचायतों के प्रधान व उप प्रधान की चयन प्रक्रिया शुरू हो पायी है. सिलीगुड़ी महकमा परिषद के अंतर्गत कुल 22 ग्राम पंचायतें हैं. इनमें से सात में वाम मोरचा ने और चार में तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. 11 ग्राम पंचायतों पर किसी भी दल का दखल नहीं हो पाया है.
इस बार बोर्ड गठन में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आयी कि मनीराम ग्राम पंचायत पर वाम मोरचा, भाजपा और कांग्रेस ने मिलकर बोर्ड का गठन किया है. चुनाव में ये सभी पार्टियां अलग-अलग लड़ी थीं. तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने के लिए तीनों विपक्षी पार्टियों ने मिलकर यहां बोर्ड गठन किया है.
शनिवार को सुबह से ही ग्राम पंचायत कार्यालयों पर राजनीतिक दलों के समर्थकों की भीड़ देखी गयी. मिली जानकारी के मुताबिक हाथीघीसा ग्राम पंचायत में प्रधान व उप प्रधान का चयन संघर्ष की वजह से नहीं हो पाया. शनिवार को यहां हुई चयन प्रक्रिया रद्द कर कोई अन्य तिथि निर्धारित करने का निर्णय प्रशासन की ओर से लिया गया है. इसके अलावा नक्सलबाड़ी, बतासी आदि ग्राम पंचायतों में भी वाम मोरचा व तृणमूल कांग्रेस के बीच संघर्ष की घटना सामने आयी है.
हाथीघीसा ग्राम पंचायत में कुल 16 सीटें हैं. इनमें से आठ सीटों पर वामो ने दखल किया, जबकि पांच पर तृणमूल कांग्रेस एवं तीन पर आदिवासी विकास परिषद ने जीत हासिल की. ऐसे में आदिवासी विकास परिषद की भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी है. हाथीघीसा ग्राम पंचायत पर वामो के दखल जमाने की अधिक उम्मीद जतायी जा रही है क्योंकि वामो को बहुमत के लिए सिर्फ एक और सदस्य का समर्थन चाहिए.
अब तृणमूल का आरोप है कि वाम मोरचा ने आदिवासी विकास परिषद के निर्वाचित सदस्यों को प्रलोभन देकर अपनी ओर कर लिया है. इसी कथित खरीद-फरोख्त का विरोध स्थानीय लोंगो ने किया.
तृणमूल के दार्जिलिंग जिला अध्यक्ष रंजन सरकार ने बताया कि टीएमसी गणतांत्रिक पद्धति से ही प्रधान व उप प्रधान के चयन प्रक्रिया में भाग ले रही है. महकमा चुनाव के समय आदिवासी विकास परिषद के साथ तृणमूल का गंठबंधन हुआ था. रंजन सरकार ने आरोप लगाया कि वाम मोरचा ने परिषद के तीन विजयी सदस्यों को नेपाल में बंधक बना कर रखा था. उन्होंने कहा कि साफ-सुथरे होने का दावा करनेवाला वाम मोरचा गंदी राजनीति के साथ ग्राम पंचायत को हथियाना चाहता है. तृणमूल कांग्रेस इस तरह की राजनीति का विरोध करती है. उन्होंने कहा कि वाममोरचा ने बहुत से तृणमूल विजयी सदस्यों को खरीदने की कोशिश की .
दूसरी ओर दार्जिलिंग जिला वाम मोरचा के वरिष्ठ नेता व सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर अशोक भट्टाचार्य ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस जबरदस्ती हाथीघीसा ग्राम पंचायत पर अधिकार करना चाहती है. ग्राम पंचायतों पर अपना अधिपत्य ना जमा पाने की वजह से तृणमूल बौखलायी हुयी है. पुलिस का गलत इस्तेमाल कर वाम मोरचा के लोकल कमिटी के सचिव माधव सरकार को गिरफ्तार कराया गया एवं झरेन सरकार के साथ मारपीट की गयी.
श्री भट्टाचार्य ने पुलिस पर पक्षपात करने का आरोप लगाते हुये कहा कि पुलिस वामों के विजयी सदस्यों के तृणमूल में शामिल होने के लिए धमका रही है. जबकि वे ऐसा नहीं होने देंगे. जनता के निर्णय की उपेक्षा कतई बरदाश्त नहीं की जायेगी.
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