सियासत: चाय श्रमिकों की मौत का मामला, तृणमूल करेगी एक दिसंबर के बंद का विरोध

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सिलीगुड़ी: डुवार्स के बागराकोट चाय बागान में श्रमिकों की मौत तथा चाय श्रमिकों की अन्य समस्याओं को लेकर एक दिसंबर को संयुक्त फोरम द्वारा आहूत चाय बागान बंद का तृणमूल कांग्रेस ने विरोध किया है. तृणमूल कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक चक्रवर्ती ने कहा कि संयुक्त फोरम के बंद से कोई लाभ नहीं होगा. उल्टे […]

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सिलीगुड़ी: डुवार्स के बागराकोट चाय बागान में श्रमिकों की मौत तथा चाय श्रमिकों की अन्य समस्याओं को लेकर एक दिसंबर को संयुक्त फोरम द्वारा आहूत चाय बागान बंद का तृणमूल कांग्रेस ने विरोध किया है. तृणमूल कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक चक्रवर्ती ने कहा कि संयुक्त फोरम के बंद से कोई लाभ नहीं होगा. उल्टे और भी कई चाय बागानों के बंद होने की संभावना है. श्री दास यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.

श्री दास ने कहा कि पूर्व वाम मोरचा सरकार की गलत नीतियों की वजह से चाय बागानों की स्थिति खस्ताहाल हुई है. उन्होंने राज्य सरकार का बचाव करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से चाय उद्योग की स्थिति सुधारने त चाय श्रमिकों के कल्याण के लिए कई कार्य किये गये हैं. उन्होंने भूख की वजह से किसी भी श्रमिक की मौत नहीं होने का दावा किया. उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल में कई चाय बागान हैं.

जहां तक डंकन्स समूह की बात है, तो पूरे उत्तर बंगाल में इस कंपनी के 14 चाय बागान हैं. इनमें से मौत की घटना सिर्फ बागराकोट चाय बागान में हो रही है. ऐसे में यह कहना कि श्रमिक भूख से मर रहे हैं, सही नहीं है. इस मुद्दे को लेकर उन्होंने पूर्ववर्ती वाम मोरचा सरकार तथा तत्कालीन मंत्री अशोक भट्टाचार्य पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि पहली बार चाय बागान के श्रमिक मर रहे हैं. वर्ष 2007 में डुवार्स के चाय बागानों में 18 सौ चाय श्रमिकों की मौत हुई थी. तब 34 चाय बागान बंद थे. उस समय वाम मोरचा सरकार ने श्रमिकों के कल्याण के लिए कुछ भी नहीं किया.

अब उसी सरकार में मंत्री रहे अशोक भट्टाचार्य तृणमूल कांग्रेस सरकार पर सवालिया निशान लगा रहे हैं. राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद बंद चाय बागानों को खुलवाने की पहल की गई. अधिकांश चाय बागानों को खोला गया. इसके अतिरिक्त चाय श्रमिकों के कल्याण के लिए कई योजनाओं की शुरूआत की गई. राज्य सरकार ने चाय श्रमिकों की मदद के लिए वेस्ट बंगाल टी प्लांटेशन इंप्लाई वेलफेयर फंड की स्थापना की है और इसमें 100 करोड़ रुपये जमा कराये गये हैं. इसी तरह से कई अन्य योजनाओं की भी शुरूआत की गई है.

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