छठी अनुसूची या केंद्रशासित क्षेत्र से कम मंजूर नहीं : गोरामुमो

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दार्जिलिंग : भाजपा के पश्चिम बंगाल राज्य अध्यक्ष दिलीप घोष के बयान के बाद पहाड़ पर राजनीतिक हलचल बढ़ गयी है. इस पर गोरामुमो और भाजपा के टिकट पर जीते दार्जिलिंग के विधायक नीरज जिम्बा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. गोरामुमो ने कहा कि अगर भाजपा व केंद्र सरकार दार्जिलिंग की समस्या के स्थायी समाधान […]

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दार्जिलिंग : भाजपा के पश्चिम बंगाल राज्य अध्यक्ष दिलीप घोष के बयान के बाद पहाड़ पर राजनीतिक हलचल बढ़ गयी है. इस पर गोरामुमो और भाजपा के टिकट पर जीते दार्जिलिंग के विधायक नीरज जिम्बा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. गोरामुमो ने कहा कि अगर भाजपा व केंद्र सरकार दार्जिलिंग की समस्या के स्थायी समाधान के पक्ष में नहीं हैं तो कम से कम उन्हें दीर्घकालीन समाधान जरूर करना होगा. यहां आशय गोरखालैंड बनाने की जगह पहाड़ पर संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की तरफ है.

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वहीं नीरज जिम्बा ने दिलीप घोष के बयान को उनकी राजनीतिक मजबूरी बताया. बता दें कि रविवार को डुआर्स में एक कार्यक्रम के दौरान दिलीप घोष ने कहा था कि उनकी पार्टी कभी गोरखालैंड का समर्थन नहीं करेगी.सोमवार को गोरामुमो के वरिष्ठ सदस्य तथा भाजपा के टिकट पर विधायक बने नीरज जिम्बा ने कहा कि गोरखालैंड का विरोध करना दिलीप घोष की मजबूरी है.

गोरामुमो की केंद्रीय कमेटी की बैठक में शामिल होने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि भाजपा ने चुनाव में अलग राज्य गोरखालैंड का वादा किया है. दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट 26 जुलाई के बाद दार्जिलिंग आयेंगे. दार्जिलिंग के जितने भी राजनीतिक दल हैं, उन सबको बुलाकर सांसद के साथ बैठक की जायेगी. बैठक में एक को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनायी जायेगी. कमेटी की एक प्रतिनिधि टोली दिल्ली जायेगी और दार्जिलिग समस्या के स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से भेंटवार्ता करेगी. श्री जिम्बा ने साफ कहा कि स्थायी राजनीतिक समाधान बंगाल के भीतर रहकर नहीं होगा.

विधायक ने कहा कि मेरे रग-रग में गोरखालैंड है, जिसके लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं.वहीं गोरामुमो की दार्जिलिंग ब्रांच कमेटी के अध्यक्ष अजय एडवार्ड ने कहा कि एक महीने के भीतर दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने सदन में दो बार दार्जिलिंग की समस्याओं को उठाया है, जिसके लिए वह उनका आभार प्रकट करते हैं. जल्द ही उनसे पत्राचार करके दार्जिलिंग के स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए पहल करने का आह्वान किया जायेगा.

लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने यह वादा किया था. इसलिए अब सांसद राजू बिष्ट को इस बारे में पहल करनी पड़ेगी. एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि स्थायी राजनीतिक समाधान तो केवल अलग राज्य गोरखालैंड ही हो सकता है. इस पर जब दिलीप घोष के बयान की ओर ध्यान दिलाया गया तो अजय एडवार्ड ने कहा कि भाजपा ने वादा तो स्थायी समाधान का ही किया है. फिर भी, अगर भाजपा अभी समस्या का स्थायी राजनीतिक समाधान करना नहीं चाहती है तो उसे कम से कम दीर्घकालीन समाधान करना होगा. उन्होंने कहा कि दीर्घकालीन समाधान का मतलब छठी अनुसूची या केंद्रशासित क्षेत्र (यूटी) का दर्जा है.

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