भूटानी गाड़ियों को रोका, निर्यात बंद,भारतीय सीमा पर माहौल गर्म, भारतीय ट्रक मालिकों में भारी रोष

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सिलीगुड़ी : दुर्गा पूजा के बाद सिलीगुड़ी से सटे भारत-बांग्लादेश सीमांत फूलबाड़ी से बोल्डर निर्यात शुरू भी नहीं हुआ था कि व्यवसायी फिर से आंदोलन पर उतारू हो गये हैं. भूटान गाड़ियों की ओवर लोडिंग बंद करने की मांग पर भारतीय व्यवसायियों ने रविवार सुबह सड़क पर उतरे. भूटान की गाड़ियों को अटका कर विरोध […]

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सिलीगुड़ी : दुर्गा पूजा के बाद सिलीगुड़ी से सटे भारत-बांग्लादेश सीमांत फूलबाड़ी से बोल्डर निर्यात शुरू भी नहीं हुआ था कि व्यवसायी फिर से आंदोलन पर उतारू हो गये हैं. भूटान गाड़ियों की ओवर लोडिंग बंद करने की मांग पर भारतीय व्यवसायियों ने रविवार सुबह सड़क पर उतरे. भूटान की गाड़ियों को अटका कर विरोध जताया. भारतीय व भूटानी व्यवसायियों के साथ पुलिस प्रशासन के खिलाफ भी आवाज बुलंद किया है. सभी के लिए समान सख्ती न बरतने पर जोरदार आंदोलन की हुंकार भारतीय व्यवसायियों ने भरी है.
उल्लेखनीय है कि ओवरलोड भूटान गाड़ियों को लेकर पिछले काफी दिनों से भारतीय व्यवसायी आंदोलन पर हैं. पहले भारत की गाड़ियां भी ओवर लोड बोल्डर लेकर सीमा पार करती थी. लेकिन भारतीय ट्रकों की ओवरलोडिंग के खिलाफ पुलिस व मोटर-वाहन विभाग ने कड़ा रूख अपनाया है. जबकि भूटान से आनेवाली ओवरलोड ट्रकें बिना किसी रोक-टोक के सीमा पार कर रही है.
फूलबाड़ी सीमांत से बोल्डर लदे 700 से अधिक ट्रक रोजाना बांग्लादेश जाते हैं. जबकि 700 से अधिक ट्रक सीमांत पर कतार में खड़े रहते हैं. इसी क्रम में कुछ ट्रक एशियन हाइवे सड़क पर भी खड़ा रहता है. इनमें से 30 प्रतिशत ट्रक भूटान के हैं. नियमानुसार एक डंपर में 18 टन बोल्डर होना चाहिए. आरोप है कि भूटान से आने वाले ट्रकों में 40 टन से भी अधिक बोल्डर होता है.
भारतीय व्यवसायियों का कहना है कि नियम व कानून सभी के लिए समान होना चाहिए. भारतीय व भूटानी ट्रकों के लिए अलग-अलग नियम कतई स्वीकार्य नहीं होगा. बांग्लादेश को बोल्डर निर्यात करने वाले भारतीय व्यवसायी प्रसेनजीत दास ने बताया कि भूटान की ओवरलोड ट्रकें करीब 200 किलोमीटर भारतीय सड़क से गुजरने के बाद फूलबाड़ी सीमा पर पहुंचती है.
लेकिन प्रशासन भूटानी ओवरलोड ट्रकों के खिलाफ कोई कार्यवायी नहीं करती. ओवरलोड न करने का नियम सिर्फ भारतीय ट्रकों के लिए है. प्रशासन की नजर में ओवरलोड भूटानी ट्रकों से हादसों की संभावना ही नहीं है. ऐसी स्थिति में व्यापार करना मुश्किल है. इसलिए आंदोलन का रास्ता अपनाया गया है. अविलंब नियम समान नहीं होने पर सड़क पर उतर कर जोरदार आंदोलन किया जायेगा.
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