दहकता पहाड़: सरकार से तत्काल त्रिपक्षीय बैठक करने की मांग, सरकार के रवैये से बिगड़ रहे हालात

सिलीगुड़ी: अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर पहाड़ पर लगातार स्थिति बिगड़ती जा रही है. हर दिन ही कहीं न कहीं हिंसा तथा आगजनी की घटनाएं हो रही हैं. ऊपर से करीब एक महीने से जारी बेमियादी बंद के कारण लोगों का जीना दूभर हो गया है. पहाड़ पर इस प्रकार की परिस्थिति पर […]
सिलीगुड़ी: अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर पहाड़ पर लगातार स्थिति बिगड़ती जा रही है. हर दिन ही कहीं न कहीं हिंसा तथा आगजनी की घटनाएं हो रही हैं. ऊपर से करीब एक महीने से जारी बेमियादी बंद के कारण लोगों का जीना दूभर हो गया है. पहाड़ पर इस प्रकार की परिस्थिति पर वाम मोरचा ने चिंता जतायी है और इसके लिए राज्य की तृणमूल सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. पहाड़ पर शांति व्यवस्था की बहाली के लिए वाम मोरचा ने तत्काल केन्द्र सरकार, राज्य सरकार तथा आंदोलनकारियों के बीच त्रिपक्षीय बैठक बुलाने की भी मांग की.
इतना ही नहीं, पुलिस ने गोजमुमो प्रमुख बिमल गुरूंग के खिलाफ हत्या तक का मुकदमा दर्ज कर लिया है. इस टकराव की वजह से ही आंदोलन ने गंभीर रूप धारण कर लिया है. श्री सरकार ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है. ज्ञापन में उन्होंने आगे कहा है कि पहाड़ पर सरकार की ओर से तानाशाही की नीति अपनायी जा रही है. दार्जिलिंग तथा कालिम्पोंग इलाके में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है. इतना ही नहीं, लोकल टीवी चैनलों को भी नहीं चलने दिया जा रहा है. उन्होंने इंटरनेट पर बैन को हटाने की मांग की. श्री सरकार ने आगे कहा है कि सभी परीक्षा परिणाम घोषित हो गये हैं और पहाड़ के बच्चे अब देश के विभिन्न कॉलेजों में अपना नामांकन कराना चाहते हैं. इंटरनेट सेवा बंद होने से ऑनलाइन फार्म भरने का काम भी बंद है. यह सूचना के अधिकार तथा शिक्षा के अधिकार कानून का भी उल्लंघन है.
श्री सरकार ने राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक के बयान की भी निंदा की. श्री सरकार ने कहा है कि तीन जुलाई को राज्य के खाद्य मंत्री ने स्वयं पहाड़ पर खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति नहीं होने देने की बात कही थी. उसके बाद से पुलिस द्वारा पहाड़ पर खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति रोकी जा रही है. इतना ही नहीं, सिलीगुड़ी के आम लोग भी पहाड़ पर खाद्य सामग्रियों को ले जाने से रोक रहे हैं. वहां आने वाले दिनों में भूखमरी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. इसकी वजह से पहाड़ पर कानून व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ने की संभावना है.
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