गोरखालैंड आंदोलन: मुख्यमंत्री पर लगाया स्थिति बिगाड़ने का आरोप, जन आंदोलन मोरचा ने किया समर्थन

Updated at :04 Jul 2017 9:48 AM
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गोरखालैंड आंदोलन: मुख्यमंत्री पर लगाया स्थिति बिगाड़ने का आरोप, जन आंदोलन मोरचा ने किया समर्थन

सिलीगुड़ी. राष्ट्रीय जन आंदोलन मोरचा ने अलग गोरखालैंड राज्य की मांग का समर्थन किया है. इस संगठन के अध्यक्ष सह-भाजपा नेता फैजल अहमद ने कहा कि पहाड़ पर गोरखालैंड की मांग काफी पुरानी है. गोरखाओं ने आजादी में भी अपना योगदान दिया है, जिसे भूलना नहीं चाहिए. गोजमुमो सुप्रीमो बिमल गुरूंग को इस आंदोलन में […]

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सिलीगुड़ी. राष्ट्रीय जन आंदोलन मोरचा ने अलग गोरखालैंड राज्य की मांग का समर्थन किया है. इस संगठन के अध्यक्ष सह-भाजपा नेता फैजल अहमद ने कहा कि पहाड़ पर गोरखालैंड की मांग काफी पुरानी है. गोरखाओं ने आजादी में भी अपना योगदान दिया है, जिसे भूलना नहीं चाहिए. गोजमुमो सुप्रीमो बिमल गुरूंग को इस आंदोलन में राष्ट्रीय जन आंदोलन मोरचा अपना समर्थन करती है.

केन्द्र सरकार अपनी नजर गोरखालैंड आंदोलन पर बनाये हुए है. यह सच है कि गोरखाओं को अपनी पहचान अभी तक नहीं मिली है. दार्जिलिंग के गोरखा देश के किसी भी जगह पर जाते हैं तो उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. किसी के पूछने पर जब यहलोग पश्चिम बंगाल के होने का कहते हैं तो कोई भरोसा नहीं करता है.

लोग सोचते हैं कि गोरखा नेपाल से हैं.इसलिए भी दार्जिलिंग के गोरखाओं के लिए अलग राज्य होना चाहिए. जिससे उन्हें अपनी पहचान मिल सके. श्री अहमद ने कहा कि गोरखालैंड राज्य की मांग आम जनता की मांग है जिसे राज्य सरकार दबाना चाहती है, ऐसी हिटलरशाही ठीक नहीं है. उन्होंने 6 जुलाई को सर्वदलीय बैठक को सफल बनाने का आह्वान भी किया.श्री अहमद ने गोजमुमो सुप्रीमो बिमल गुरूंग से सर्वदलीय बैठक में आने की अपील की. गोरखालैंड राज्य के लिए आज पूरे देश में गोरखा समुदाय के द्वारा धरना-प्रदर्शन कर मांग की जा रही है. दार्जिलिंग के युवा पढ़ाई करके घर में हैं. उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है. वे कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं. श्री अहमद ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने पहाड़ पर विभिन्न बोर्ड बना कर गोरखाओं पर राज करना चाहती थी. लेकिन पहाड़ पर पढ़े-लिखे युवाओं को नौकरी देती तो अच्छा रहता. दार्जिलिंग बंद के लिए मुख्यमंत्री ही जिम्मेदार हैं.

पर्यटन मंत्री गौतम देव पर आरोप लगाते हुए कहा कि गोरखालैंड आंदोलन भाजपा या गोजमुमो का नहीं है, बल्कि यह आंदोलन गोरखाओं का है. उन्होंने गौतम देव के आंदोलन को भाजपा तथा गोजमुमो के उसकावे के आरोप का भी खंडन किया. देश की सुरक्षा हो या देश की आजादी गोरखाओं ने अपने जान पर खेल कर देश की रक्षा की है. राष्ट्रीय जनांदोलन मोरचा द्वारा 15 जुलाई को गोरखालैंड आंदोलन पर एक रिपोर्ट गृहमंत्री राजनाथ सिंह तथा पीएमओ ऑफिस को दिया जायेगा. फैसल अहमद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के बढ़ते जनाधार से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डर गई हैं, इसलिए बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं को डराया जा रहा है. उनके डराने से भाजपा डरने वाली नहीं है और न कार्यकर्ता डरने वाले हैं.

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