शुभेंदु अधिकारी ने ठुकराई विश्व हिंदू परिषद की मांग, बोले- दुर्गा पूजा में मांसाहार पर रोक नहीं

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बंगाल के चीफ मिनिस्टर शुभेंदु अधिकारी.

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विश्व हिंदू परिषद की मांसाहार पर रोक लगाने की मांग के बावजूद पश्चिम बंगाल सरकार ने दुर्गा पूजा के दौरान इस पर कोई पाबंदी नहीं लगाने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने परंपराओं को जारी रखने की बात कही है.

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कोलकाता से शिव कुमार राउत की रिपोर्ट

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दुर्गापूजा के दौरान मांस-मछली खाने को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने फिलहाल किसी तरह की पाबंदी लगाने के संकेत नहीं दिये हैं. सोमवार को मिलन मेला प्रांगण में दुर्गापूजा से जुड़े कई फैसलों की घोषणा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने की, लेकिन उन्होंने पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर कोई निर्देश या प्रतिबंध की बात नहीं कही.

विश्व हिंदू परिषद ने रखी थी मांग

विश्व हिंदू परिषद की ओर से पूजा मंडपों के आसपास मांसाहारी भोजन की बिक्री और सेवन नहीं करने का सुझाव दिये जाने के बाद इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में बहस तेज हो गयी थी. सवाल उठने लगा था कि क्या इस बार दुर्गापूजा में बंगाल के लोगों को मांस-मछली खाने से रोका जायेगा. हालांकि, राज्य सचिवालय नबान्न सूत्रों के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद की ओर से अपनी विचारधारा के आधार पर सुझाव दिये गये थे, लेकिन राज्य सरकार मांसाहारी भोजन पर किसी तरह का प्रतिबंध लागू नहीं करना चाहती.

शमिक ने भी किया था विरोध

इस मसले पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य शमिक भट्टाचार्य ने सोमवार को बाबा धीरेंद्र शास्त्री की उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने बंगालियों से दुर्गापूजा के दौरान मांसाहारी भोजन छोड़ देने को कहा था. भट्टाचार्य ने कहा कि बाहर से आने वाला कोई भी धर्म गुरु यह तय नहीं कर सकता कि राज्य के लोग क्या खाएं या क्या पहनें. उन्होंने कहा कि किसी बाहरी व्यक्ति के कहने पर बंगाली खान-पान की आदतों और परंपराओं को बदला नहीं जा सकता.

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हम नहीं छोड़ेंगे परंपरा

प्रदेश भाजपा प्रमुख ने कहा, ‘‘मुझे अपने तरीके से जीने दें. बंगाली वही खायेंगे जो वे खाते आए हैं. क्या बंगाली मछली और मांस नहीं खा सकते? स्वामी विवेकानंद ने ऐसा कहा है. उनसे बड़ा कौन है?’ उन्होंने कहा, ‘‘यहां मां काली को बकरे की बलि दी जाती है.’’ भट्टाचार्य ने कहा कि अष्टमी पर 'लुची' (पूरी) और नवमी पर बकरे का मांस खाना बंगाल की पुरानी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रहा है और लोगों से इसे छोड़ने के लिए कहने का कोई सवाल ही नहीं उठता. हम ऐसा करना जारी रखेंगे.

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