TMC सिंबल विवाद : चुनाव आयोग में आज दस्तावेजों की जंग, रीतब्रत को मात देने के लिए ममता समर्थकों के पास हैं ये पेपर

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ममता बनर्जी और रीतब्रत बनर्जी

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तृणमूल कांग्रेस के सिंबल विवाद पर चुनाव आयोग में आज दस्तावेजों की जंग छिड़ गई है. ममता बनर्जी समर्थक खेमे ने रीतब्रत गुट के विशेष अधिवेशन को अवैध करार दिया है. आयोग के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं.

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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच आज आयोग में दस्तावेजों की जंग जारी है. तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी समर्थक खेमे का दावा है कि 22 जून को रीतब्रत गुट के विशेष अधिवेशन से पहले ही 20 जून को कालीघाट में बैठक कर पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने संगठनात्मक बदलाव कर दिए थे. चंद्रिमा भट्टाचार्य को तृणमूल के बैंक अकाउंट की अधिकृत सिग्नेरी और चुनाव आयोग की अधिकृत प्रतिनिधि की जिम्मेदारी से हटा दिया गया था.

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चंद्रिमा भट्टाचार्य का पत्र और दावे

इसी बीच, 12 सितंबर को चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आयोग को पत्र लिखकर बताया कि 20 जून को ऐसी कोई बैठक नहीं हुई थी. उस समय वह तृणमूल की प्रदेश अध्यक्ष थीं. उन्हें इस बैठक का कोई निमंत्रण नहीं मिला था. समर्थक समर्थक तृणमूल व्हाट्सएप संदेशों का इस्तेमाल पलटवार के तौर पर कर रही है. उस दिन हुई बैठक के लिए पार्टी के अन्य शीर्ष नेताओं को भेजे गए निमंत्रण पत्र की एक प्रति प्रस्तुत की जा रही है.

22 जून के सत्र के बाद का दावा

दूसरी ओर, रीतब्रत गुट अलीपुर अदालत के फैसले को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है. कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष के रूप में, इस समय कोई अधिकार नहीं रखती हैं. ममता को 22 जून के सत्र के बाद पद से हटा दिया गया था.

अदालत का फैसला तय करना आयोग का काम नहीं

ऐसे में ममता समर्थक तृणमूल का कहना है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है. अदालत का फैसला तय करना आयोग का काम नहीं है. आयोग अपना फैसला स्वतंत्र रूप से देगा. अगर अदालत के फैसले का सम्मान करना है, तो यह बहस अदालत में ही खत्म हो जानी चाहिए. तब आयोग की कोई जरूरत ही नहीं रहेगी.

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रीतब्रत गुट का अधिवेशन अवैध

इसके अलावा, ममता समर्थक तृणमूल का दावा है कि तृणमूल के संविधान में स्पष्ट रूप से लिखा है कि अध्यक्ष का चुनाव हर पांच साल में होगा. पिछला चुनाव 2022 में हुआ था. अगला चुनाव 2027 में है. इसलिए, इस साल 22 जून को रीतब्रत गुट का अधिवेशन अवैध है. ममता समर्थक तृणमूल इस मुद्दे को उठाएगी. एक पक्ष के खिलाफ जानकारी प्रस्तुत की जा रही है, जिसके आधार पर चुनाव आयोग इस बात पर नजर रखेगा कि क्या दोनों पक्षों को 17 तारीख को सुनवाई के लिए बुलाया जाता है.

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