पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 57 सीट पर कांटे का मुकाबला, जो जीता वही सिकंदर

Author Ashish Jha
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ममता और मोदी

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Bengal Election: बंगाल में पहले सत्ता बड़े आंदोलनों से बदलती रही है, लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में SIR से सत्ता बदलने की बात कही जा रही है. कुछ हजार वोट कम और अधिक होने नतीजा बदल सकता है. पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह पता चलता है कि इस बार सत्ता तक पहुंचने के लिए भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस दोनों की राह मुश्किल हैं.

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Bengal Election: कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 57 सीटों कड़ा मुकाबला है. पिछले चुनावों में भी इन सीटों पर जीत हार का फासला बेहद कम था. राज्य में हुए SIR के बाद यहां समीकरण बदल सकते हैं और परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं. इसके अलावा, इस बार का चुनाव बड़े मुद्दों और नारों के साथ-साथ बूथ मैनेजमेंट पर भी टिका है. 2021 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल ने 213 और भाजपा 77 सीटों पर जीत हासिल की थी. ऐसे में भाजपा और तृणमूल दोनों पार्टियां अपने-अपने वोटरों को बूथ तक ले जाने की जी भर कोशिश कर रही हैं. दोनों पार्टियां एक-एक वोट के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं.

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57 सीटों पर महज 8,000 वोटों से हुई हार-जीत

2021 के चुनावों की बात करें तो 57 सीटों पर महज 8,000 वोटों से हार-जीत का फैसला हुआ था. इस बार भी इन्हीं सीटों पर सभी की नजरें टिकी हैं. इन सीटों पर वोट प्रतिशत का थोड़ा बदलाव जीत हार में बड़ा अंतर पैदा कर सकता है. पिछली बार इन 57 में से 29 सीटें ममता बनर्जी और 28 सीटें नरेंद्र मोदी के पाले में गई थीं. इनमें से 19 सीटें ऐसी थीं, जहां प्रत्याशियों की हार-जीत का अंतर 3,000 से भी कम वोटों का रहा था. उन 19 में से 12 भाजपा और 7 सीट तृणमूल के खाते में गई. यानी पिछले मुकाबले में भाजपा का प्रदर्शन बढ़िया रहा.

कम अंतर वाली 57 सीटों में से 47 दक्षिण बंगाल में

कम अंतर से जीतने वाली 57 सीटों में से 47 दक्षिण बंगाल में हैं. उत्तरी बंगाल में ऐसी केवल 10 सीटें हैं. दक्षिण को तृणमूल कांग्रेस का गढ़ है. भाजपा इस बार दक्षिण में थोड़ी ज्यादा मेहनत कर रही है. SIR के तहत जिन तीन जिलों में सबसे अधिक नाम काटे गये हैं, वो जिले भी दक्षिण बंगाल में ही आते हैं. ममता बनर्जी के सामने कम मार्जिन वाली सीटों पर बढ़त बरकरार रखने की चुनौती है. सत्ता बचाने के लिए इन सीटों को हर हाल में जीतना होगा. असल परीक्षा इन्हीं सीटों पर होगी और जो इन सीटों को जीत लेगा वही बंगाल की सत्ता का सिकंदर बनेगा.

कूचबिहार में केवल 57 वोटों से हुई थी जीत

पश्चिम बंगाल में पिछले विधानसभा चुनाव में कई ऐसी सीटें थीं, जहां प्रत्याशियों के जीत-हार का अंतर हजार वोटों का ही रहा. बांकुड़ा सीट से भाजपा प्रत्याशी ने 1,468 वोटों से जीत हासिल की थी. कुल्टी में मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा और अंत में भाजपा के उम्मीदवार 679 वोटों से विजयी हुए. तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पूर्व प्रमुख ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से हराया था. कूचबिहार में रोमांचक मुकाबला हुआ था. भाजपा के निशीथ प्रमाणिक ने सिर्फ 57 वोटों से जीत दर्ज की थी.

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ममता बनर्जी की बढ़ेंगी मुश्किलें

विधानसभा के इन सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबलों से अलग है, लेकिन कांग्रेस भी कुछ गैर-भाजपा वोटों में सेंधमारी कर सकती है. इससे ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ेंगी. हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी अब बेसर हो चुकी है, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी का असर देखना होगा. कुछ हजार वोटों से जीत-हार तय होने वाली सीटों पर ये छोटे-छोटे फैक्टर बड़ा असर दिखा सकते हैं. खास कर तब जब वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में वोटरों के नाम काटे गये हों.

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