केंद्र की नीतियों से चरमरायी अर्थव्यवस्था : ममता

Updated at : 07 Dec 2019 2:21 AM (IST)
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केंद्र की नीतियों से चरमरायी अर्थव्यवस्था : ममता

खामियां छिपाने में जुटा बंगाल में लागू नहीं होने दिये जायेंगे एनआरसी और सीएबी हैदराबाद कांड निंदनीय, कानून और सख्त करना जरूरी कोलकाता : केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है. कल-कारखाने बंद हो रहे हैं. उद्योगपति देश छोड़कर जा रहे हैं. राजनीतिक फायदे के लिए केंद्रीय एजेंसियों का […]

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खामियां छिपाने में जुटा

बंगाल में लागू नहीं होने दिये जायेंगे एनआरसी और सीएबी
हैदराबाद कांड निंदनीय, कानून और सख्त करना जरूरी
कोलकाता : केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है. कल-कारखाने बंद हो रहे हैं. उद्योगपति देश छोड़कर जा रहे हैं. राजनीतिक फायदे के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. देश में बेरोजगारी 40 प्रतिशत बढ़ी है. प्याज की कीमत 140 रुपये प्रति किलो पहुंच गयी है.
खाद्यानों की कीमत नियंत्रण का काम किसका है? मूलभूत समस्याओं को दूर करने की बजाए केंद्र सरकार अपनी खामियों को छिपाने की कोशिश में लगी है. यही वजह है कि लोगों को बेवजह के मुद्दों में उलझाये रखने की कोशिश जारी है. यह आरोप राज्य की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने लगाये हैं.
एकता दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को मेयो रोड में तृणमूल कांग्रेस की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल के प्रति केंद्र का रवैया पक्षपातपूर्ण है. देश के विषम हालात के बावजूद पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार लोगों के हित के लिए काम कर रही है. मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि राज्य में 40 प्रतिशत बेरोजगारी कम कर दिये गये हैं.
हैदराबाद में वेटनरी डॉक्टर से सामूहिक दुष्कर्म व हत्या की घटना की निंदा करते हुए मुख्यंत्री ने कहा कि कानून और सख्त करने की जरूरत है. महिलाओं की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार पूरी तरह से तत्पर है. यही वजह है कि यहां 85 फास्ट ट्रैक कोर्ट और 19 मानवाधिकार कोर्ट हैं. राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) और नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि बंगाल में इसे लागू नहीं होने दिया जायेगा. दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.
केंद्र की नीतियों की वजह से अब जैसे देश में स्वाधीनता की दूसरी लड़ाई लड़े जाने की नौबत आ गयी है. एनआरसी, कैब व भाजपा नीत केंद्र सरकार की दोषपूर्ण नीतियों के खिलाफ और लोकतंत्र की रक्षा के लिए मुहल्ले-मुहल्ले में लोग आंदोलन करें.
विरोध रैली निकालें व सभा करें. अन्य राजनीतिक दलों से भी एनआरसी व कैब का विरोध करने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सभी समुदायों के लोगों को नागरिकता देने की बात हो तो तृणमूल कांग्रेस इसे स्वीकार करेगी, लेकिन धर्म के आधार पर भेदभाव किया जायेगा तो इसके खिलाफ लड़ाई होगी. छह दिसंबर 1992 को याद करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उस दिन जो हुआ था, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता.
देशवासी दंगा नहीं, बल्कि शांति चाहते हैं. इस तरह की घटना दोबारा नहीं हो, इसके लिए उन्होंने लोगों से सतर्क रहने के साथ ही विभेद की राजनीति करने वालों से दूर रहने की सलाह भी दी. कार्यक्रम का संचालन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने किया जबकि इस मौके पर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे.
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