कोलकाता : डॉक्टर की सलाह बिना डेंगू मरीज न लें ब्रूफेन-एस्प्रिन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 Aug 2018 7:35 AM (IST)
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कोलकाता/नयी दिल्ली : डेंगू और चिकनगुनिया की आशंका है, तो डॉक्टर की सलाह के बगैर ब्रूफेन तथा एस्प्रिन की दवाइयां न लें. यह जानलेवा हो सकता है. दिल्ली सरकार ने तो इनके खतरों को देखते हुए बिक्री पर रोक लगा दी है. मेडिकल स्टोरवाले केवल डॉक्टरों की पर्ची पर ही ब्रूफेन और एस्प्रिन की दवाइयां […]
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कोलकाता/नयी दिल्ली : डेंगू और चिकनगुनिया की आशंका है, तो डॉक्टर की सलाह के बगैर ब्रूफेन तथा एस्प्रिन की दवाइयां न लें. यह जानलेवा हो सकता है.
दिल्ली सरकार ने तो इनके खतरों को देखते हुए बिक्री पर रोक लगा दी है. मेडिकल स्टोरवाले केवल डॉक्टरों की पर्ची पर ही ब्रूफेन और एस्प्रिन की दवाइयां दे पायेंगे. डेंगू के मरीज अनजाने में इन दोनों दवाइयों को ले लेते हैं, जो उनके लिए खतरनाक हो जाता है. इससे डेंगू मरीजों के प्लेटलेट्स में तेजी से कमी होनी शुरू हो जाती है.डेंगू के अलावा इंसेफलाइटिस, हेपेटाइटिस ए एवं बी जैसी अन्य बीमारियों का इलाज होम्योपैथिक में संभव है. डेंगू जिस तरह खतरनाक बीमारी है, वैसे में रोगी को थोड़ी-सी भी लापरवाही घातक हो सकती है.
राज्य में बढ़ने लगा डेंगू-चिकनगुनिया का खतरा
कोलकाता सहित पश्चिम बंगाल में बारिश होने पर कई जगहों पर पानी जमा होता है. इस पानी में मच्छर पनपते हैं, इसलिए अगस्त से अक्तूबर के बीच मच्छर जनित बीमारियां अधिक होती हैं. अभी कुछ सप्ताह से डेंगू के भी कुछ मामले देखे जा रहे हैं. एक मादा मच्छर एक बार में 200 अंडे देती है, इसलिए मच्छरों को मारने से ज्यादा उनका प्रजनन रोकना जरूरी है. इसके लिए आवश्यक है कि कहीं पानी जमा न होने पाये.
बुखार के हर मरीज की जांच जरूरी नहीं
बरसात में डेंगू व चिकनगुनिया के मरीज अधिक देखे जाते हैं. डेंगू में तेज बुखार के साथ दर्द, शरीर पर लाल दाने, आंखों के पीछे दर्द आदि की समस्या होती है. चिकनगुनिया में बुखार के साथ शरीर के जोड़ों में दर्द की परेशानी होती है.
जब इन बीमारियों के मामले अधिक आ रहे हों, तो बुखार के हर मरीज की जांच जरूरी नहीं होती. ऐसा दिशा-निर्देश तैयार करनेवालीं एजेंसियां भी मानती हैं. हालांकि अस्पतालों को स्पष्ट रूप से जांच कराने के निर्देश दिये गये हैं. पहली श्रेणी में सामान्य व युवा मरीज होते हैं, जिन्हें गंभीर लक्षण नहीं होते. ऐसे मरीजों को सिर्फ बुखार की दवा, ओआरएस और अन्य तरल पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है. दूसरी श्रेणी में छोटे बच्चे, बुजुर्ग व गर्भवती महिलाओं को रखा जाता है. इनमें डेंगू की पुष्टि होने पर अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए. ऐसे निर्देश सभी अस्पतालों को दिये गये हैं.
होम्योपैथ में भी है डेंगू का इलाज
डेंगू का कारगर इलाज होम्योपैथ में संभव है. चिकित्सकों के अनुसार एकोनाइट, आर्सनिक अल्बम, बेलाडोना, यूपेटोरियम पर्फ व रस्टक 6 शक्ति- इन सभी होम्योपैथिक दवाओं का दो-दो बूंद लेकर आधा गिलास साफ पानी में डाल दें और चम्मच से मिला दें. इसमें से आधा चम्मच एक-एक घंटा पर रोगी को पिलायें. जब आराम होने लगे, तो इसे चार-चार घंटे पर दें. दवा का सेवन करते समय महकवाली कोई वस्तु रोगी को न लगायें. जैसे- विक्स, कपूर, बाम, हिंग, जाफर आदि शरीर में न लगायें और रोगी के पास इन सबों से बनी कोई दवा भी न रखें.
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