लर्न, अर्न और रिटर्न से देश होगा मजबूत - उपराष्ट्रपति
Updated at : 29 Jun 2018 2:03 AM (IST)
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कोलकाता : देश के प्रति हर नागरिक का अपना दायित्व होता है, जिसका पालन हर हाल में करना चाहिए. हमारे देश में काफी प्रतिभावान युवा हैं. कई प्रतिभाशाली युवाओं को विदेशी मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा अच्छा पैकेज व ऑफर मिलता है और वह विदेश का रुख कर लेते हैं. वे युवा अपनी प्रतिभा व कर्मठता के […]
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कोलकाता : देश के प्रति हर नागरिक का अपना दायित्व होता है, जिसका पालन हर हाल में करना चाहिए. हमारे देश में काफी प्रतिभावान युवा हैं. कई प्रतिभाशाली युवाओं को विदेशी मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा अच्छा पैकेज व ऑफर मिलता है और वह विदेश का रुख कर लेते हैं.
वे युवा अपनी प्रतिभा व कर्मठता के बल पर विदेशों में भी सफलता के झंड़े गाड़ते हैं.
इन युवाओं से मेरा आग्रह है कि यदि वह लर्न, अर्न और रिटर्न वाली थ्योरी पर गौर फरमाते हैं तो इससे उनका तो भला होगा ही साथ ही देश के प्रति उनकी जिम्मेदारी भी पूरी होगी. उक्त बातें उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कोलकाता स्थित साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स (एसआइएनपी) के एक कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहीं.
साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स के वैज्ञानिको को संबोधित करते हुए श्री नायडू ने कहा कि हमारे प्रतिभाशाली युवा विदेशों में जाकर वहां की उन्नत तकनीकी को सीखें. वहा रहकर कमाई भी करें और एक समय के बाद वह अपनी मातृभूमि वापस आकर देश के लिए कार्य करें. इस दौरान श्री नायडू ने देश के विकास में वैज्ञानिक समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि हमारा देश जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान के सिद्धांत को लेकर चलने वाला है. ऐसे में मेरा देश के वैज्ञानिक समुदाय से आग्रह है कि हमारे वैज्ञानिक भी इसी सिद्धांत के तहत काम करें और एेसी दवाइयों की खोज करें जिसे कैंसर जैसी आसाध्य बीमारियों से लोगों को राहत मिले.
अपने संबोधन से पहले उपराष्ट्रपति ने साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स ने नये रिसर्च लैब फैना भवन का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने बायोलॉजी लैब, साइंस मैटेरियल लैब और लेजर लैब का निरीक्षण किया और वहां उपस्थित युवा व वरिष्ठ वैज्ञानिको से बातचीत की. इस दौरान राज्य के मंत्री ब्रात्य बसु भी उपस्थित थे.
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स के निदेशक अजित कुमार मोहंती ने कहा की इस एसआइएनपी की स्थापना मेघनाथ साहा ने 1950 में की थी. भारत सरकार के एटॉमिक एनर्जी मंत्रालय के तहत आनेवाले इस इंस्टीट्यूट के सबसे पहले निदेश प्रख्यात वैज्ञानिक प्रोफेसर मेघनाथ साहा थे. श्री मोहंती ने बताया कि इस इंस्टीट्यूट में सबसे पहले न्यूक्लियर एनर्जी की पढ़ाई शुरू हुई थी. यहां प्लाजमा, एटॉमिक फिजिक्स और नैनो मैटेरियल में रिसर्च होता है. यहां सौ फैकल्टी हैं और हर वर्ष यहां से 40 छात्र पीएचडी के पंजीकृत होते हैं.
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