दो की राष्ट्रीय हड़ताल पर यूनियनों का संयुक्त सम्मेलन आज

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आसनसोल : केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों व श्रम कानूनों में संशोधन कर श्रमिक विरोधी नीतियों को लागू करने, बढ़ती महंगाई सहित विभिन्न मांगों के समर्थन में विभिन्न केंद्रीय यूनियनों का संयुक्त सम्मेलन सात अगस्त को स्थानीय रवींद्र भवन में आयोजित होगा. यह जानकारी देते हुए स्थानीय होटल इन में यूनियन नेताओं ने कहा कि […]

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आसनसोल : केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों व श्रम कानूनों में संशोधन कर श्रमिक विरोधी नीतियों को लागू करने, बढ़ती महंगाई सहित विभिन्न मांगों के समर्थन में विभिन्न केंद्रीय यूनियनों का संयुक्त सम्मेलन सात अगस्त को स्थानीय रवींद्र भवन में आयोजित होगा.
यह जानकारी देते हुए स्थानीय होटल इन में यूनियन नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार के खिलाफ हड़ताल के अलावा और कोई विकल्प नहीं रह गया है.
यूनियन नेताओं में सीएमएस के महासचिव व पूर्व सांसद आरसी सिंह (एटक), पूर्व सांसद वंशगोपाल चौधरी, बीएमएस के नरेंद्र कुमार सिंह, धनंजय पपांडेय, इंटक के नेता चंडी चटर्जी, आरपी शर्मा, सीएलडब्ल्यू के श्रमिक नेता रंजीत दास, टीयूसीसी के नेता भवानी आचार्या, राजद के जिलाध्यक्ष नंदबिहारी यादव, जनता दल (यूनाइटेड) के नेता सुनील यादव, श्रमिक नेता विधु चौधरी, रोबिन मुखर्जी, तरूण कांति भट्टाचार्या, विश्वजीत महतो तथा माकपा के पूर्व आसनसोल जोनल सचिव पार्थ मुखर्जी आदि मौजूद थे.
वक्ताओं ने कहा कि ब्रिटिश शासकों से संघर्ष के बाद तथा आजादी के बाद विभिन्न चरणों में मिले श्रमिकों के कानूनी अधिकार को केंद्रीय सरकार समाप्त करने की दिशा में सक्रिय है.
श्रमिकों से संगठन बनाने, आंदोलन व हड़ताल करने के अधिकार छिने जा रहे हैं. ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि सरकार की श्रमिक व देश विरोधी नीतियों के खिलाफ कोई प्रतिवाद न हो. उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों व बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों तो देखते हुए संशोधन किये जा रहे है.
उन्होंने कहा कि कोयला उद्योग का निजीकरण किया जा रहा है. कोयला ब्लॉकों का आवंटन वाणिज्यिक उत्पादन की शर्त्त के साथ हो रहा है. इसका मकसद सरकारी कंपनियों के के अस्तित्व को समाप्त करना है. आउटसोर्सिग की जा रही है, लेकिन इसमें कार्यरत श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही है. उन्हें कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है.
पीएफ व पेंशन की राशि खुले बाजार में ले जाने की योजना है. उन्होंने कहा कि रेल कर्मियों ने भी हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है. रेलवे में शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का निर्णय लिया गया है. ठेकका श्रमिकों के स्थायी से संबंधित कानून को बदल दिया गया है. उन्होंने कहा कि ठेका व दिहाड़ी श्रमिकों को कम से कम 15 हजार रुपये न्यूनतम मजदूरी मिलनी चाहिए. उन्होंने तहा कि केंद्र सरकार की योजना मद से चलनेवाली सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं में 50 फीसदी तक की कटौती कर दी गयी है.
इसके कारण कमजोर तबके में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैल रही है.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां पूरी तरह से श्रमिक, उद्योग व राष्ट्रविरोधी है. कारखाने बंद हो रहे हैं. बीमार सरकारी कंपनियों की स्थिति सुधारने के बजाय उन्हें बंदी की ओर ढ़केला जा रहा है.
एचसीएल के श्रमिकों को 16 माह से वेतन नहीं मिला है. इस स्थिति में हड़ताल तो अंतिम विकल्प मान कर देश की सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने दो सितंबर को राष्ट्रीय हड़ताल का निर्णय लिया है. इसे मुसलिम लीग तथा शिवसेना से जुड़े श्रमिक संगठनों ने समर्थन दिया है. शुक्र वार के सम्मेलन में इसकी सफलता की रणनीति बनायी जायेगी.
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