जनदबाव ना होता तो पुलिस नहीं दर्ज करती एफआईआर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Jun 2019 6:37 AM

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रानीगंज : गरीबी और अमीरी की रेखा पुनः एक बार समाज मे उस वक्त रानीगंज में नजर आई. जब रानीगंज के वार्ड नंबर 91 के लायक बांध में रहने वाली विधवा बबीता सिंह के बेटे की मृत्यु की एफआईआर अंततः मोहल्ले वासियों के लगातार पुलिस पर बढ़ते दबाव के कारण शनिवार को लेना पड़ा. ज्ञात […]

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रानीगंज : गरीबी और अमीरी की रेखा पुनः एक बार समाज मे उस वक्त रानीगंज में नजर आई. जब रानीगंज के वार्ड नंबर 91 के लायक बांध में रहने वाली विधवा बबीता सिंह के बेटे की मृत्यु की एफआईआर अंततः मोहल्ले वासियों के लगातार पुलिस पर बढ़ते दबाव के कारण शनिवार को लेना पड़ा.

ज्ञात हो कि बबीता सिंह के परिवार का एकमात्र कमाने वाला 19 वर्षीय युवक सोनू को मात्र एक खीरा चोरी करने के आरोप में मोहल्ले में अवैध रूप से शराब बेचने वाले सूखेन नोनिया तथा उसकी पत्नी ने पीटकर मार डाला. इस घटना के पश्चात सूखेन नोनिया अपनी पत्नी तथा पुत्र को लेकर फरार हो लिया. दूसरी ओर रेलवे रैक में कार्य करने वाले मृतक सोनू सिंह को पिटाई करने वाले आरोपी सूखेन नोनिया की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बीते दो दिन पूर्व भी मोहल्ले वासी रानीगंज थाना में जाकर पुलिस के पास आवेदन किया था पर पुलिस ने लिखित अभियोग किए जाने के बात कहने पर पढ़े-लिखे न होने के कारण मोहल्ले वाले बैरंग वापस लौट गए थे.

कोलकाता के पीजी अस्पताल में दो दिन पूर्व जब सोनू सिंह की मृत्यु के पश्चात उसका शव शुक्रवार की रात ग्यारह बजे रानीगंज पहुंचा तो मोहल्ले के लोग पुन: आक्राशित हो गये. इस बार शव को लेकर रानीगंज थाना में पहुंचे और आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया, पर पुलिस ने यह कह कर टाल दिया की एफआईआर शनिवार को ली जाएगी.

वहीं दूसरी ओर रानीगंज के नए थाना प्रभारी संजय चक्रवर्ती ने बताया की मृतका की मां बबीता सिंह के लगाए आरोप के आधार पर सूखेन नोनिया के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है. मोहल्ले वासियों का कहना है कि लायक बांध में अवैध रूप से शराब बेचने वाले शराब कारोबारियों का इतना अधिक दबदबा है कि अगर किसी भी प्रकार की घटना घटती है तो सत्ता दल तथा पुलिस की मदद से दबाने का प्रयास करते हैं. यही घटना सोनू सिंह के साथ भी घटी. मोहल्ले वासियों ने कहा कि खुलेआम शराब की बिक्री कई घरों को बर्बाद कर चुकी है एवं कई परिवारों को बर्बादी कर रही है.
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि गरीब होने के कारण ही सोनू सिंह का एफआईआर पुलिस ने नहीं लिया. अगर सोनू सिंह सामर्थवान होता तो उस पर जानलेवा हमला किए जाने के पश्चात ही एफआईआर कर लिया जाता एवं आरोपी इस वक्त जेल में होता.
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