शिल्पांचल में फोनी के कहर से कई कच्चे मकान धराशायी, खेतों में जलभराव
Author Prabhat khabar digital desk
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कई स्थानों पर पेड़ व बिजली के खंभे गिरने से लोगों को हो रही परेशानी कई मकानों के छत उड़ गये, किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसल को पहुंचा नुकसान, किसान चिंतित पानागढ़ : पूर्व बर्दवान जिले के धान कृषकों की चिंता बढ़ गई है. रात भर हुई […]
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कई स्थानों पर पेड़ व बिजली के खंभे गिरने से लोगों को हो रही परेशानी
कई मकानों के छत उड़ गये, किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं
हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसल को पहुंचा नुकसान, किसान चिंतित
पानागढ़ : पूर्व बर्दवान जिले के धान कृषकों की चिंता बढ़ गई है. रात भर हुई बारिश के कारण खेतों में मौजूद 80 प्रतिशत धानों के सड़ने की आशंका बढ़ गई है. बताया जाता है कि हाल ही में आलू की खेती के नुकसान को लेकर कई कृषकों ने जिले में आत्महत्या कर ली थी. ऐसे में अब प्राकृतिक आपदा के कारण धान की फसलों के नुकसान होने से जिले के कई कृषकों की चिंता बढ़ गई है. कालना दो ब्लॉक के कृषक शंकर का हाल ही में खेत के पास फांसी से झूलता शव मिला था.
कर्ज लेकर आलू की खेती की थी. बिना मौसम बारिश से आलू की फसल खेत में ही सड़ गयी थी. बताया जाता है कि आठ बीघा भूमि पर धान की खेती भी शंकर ने की थी. इस अकाल चक्रवाती तूफान फोनी के कारण हुई बारिश से धान की फसलों के नुकसान की आशंका बढ़ गई है. लेकिन इससे पहले ही आलू के नुकसान को ही वह बर्दाश्त नहीं कर पाए और आत्महत्या कर लिया था। कृषक सुखदेव का भी यही हाल है. आलू की खेती में उसे भी काफी नुकसान हुआ है.
धान की खेती कर वह कर्ज तथा नुकसान की भरपाई करने की सोच रहा था. इस प्राकृतिक आपदा के कारण है 10 दिन के बाद कटने वाली धान खेत में सड़ने लगेगी. सुखदेव का कहना है कि राज्य सरकार इस दिशा में मदद नहीं करती है तो आत्महत्या के सिवाय और कोई उपाय नहीं है. कृषक सनातन पाल का भी यही कहना है कि उसने भी आलू की खेती में नुकसान हुआ था. सोचा था कि धान की खेती कर नुकसान की भरपाई हो जायेगी लेकिन इससे पूर्व बारिश के कारण धान सड़ने लगेंगे.
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