हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी वेतन लंबित

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बर्दवान : राज्य में तृणमूल सरकार ��ठित होने के बाद माकपा से जुड़े शिक्षक संगठन के नेता अशोक घोष को उनके स्कूल में प्रवेश करने से रोक दिया गया था. भीटा एमपी स्कूल कार्यकारिणी कमिटी ने चार जून, 2014 को यह निर्णय लिया. वे स्कूल के सहायक प्रधानाध्यापक थे. उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर […]

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बर्दवान : राज्य में तृणमूल सरकार गठित होने के बाद माकपा से जुड़े शिक्षक संगठन के नेता अशोक घोष को उनके स्कूल में प्रवेश करने से रोक दिया गया था. भीटा एमपी स्कूल कार्यकारिणी कमिटी ने चार जून, 2014 को यह निर्णय लिया. वे स्कूल के सहायक प्रधानाध्यापक थे. उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की. हाई कोर्ट ने उन्हें स्कूल जाने के लिए पुलिस सुरक्षा देने को कहा.
लेकिन उन्हें पुलिस सुरक्षा नहीं मिली. 31 मार्च, 2017 को वे आखिरी बार स्कूल गये. 31 मार्च, 2018 को वे रिटायर हो गये. अवकाश के समय उनका 39 महीने का वेतन बकाया था. इसके भुगतान के लिए उन्होंने पुन: हाई कोर्ट में याचिका दायर की.
इसके बाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश प्रतीक प्रकाश बनर्जी ने स्कूल और शिक्षा विभाग को बकाया भुगतान करने का आदेश दिया. उन्होंने कोर्ट के आदेश की प्रति जिला बिद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा कराई. टीर इंचार्ज दिलीप पाकडे ने टिप्पणी करने से इंकार किया. जिला बिद्यालय निरीक्षक श्रीधर प्रमाणिक ने कहा कि उन्हें इस आदेश की जानकारी नहीं है. प्रति मिलने पर उचित कार्रवाई की जायेगी.
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