घुसपैठ, ड्रग और मानव तस्करी पर शिकंजा कसने की तैयारी, बंगाल सीमा पर बढ़ेगा AI-ड्रोन का पहरा

Updated:
विज्ञापन

घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए AI-ड्रोन पर जोर, एआई फोटो

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

Border Security: पश्चिम बंगाल से लगी भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा की चुनौती अब सिर्फ घुसपैठ तक सीमित नहीं रही. ड्रोन, तस्करी, मानव तस्करी और अवैध आवाजाही जैसे नए खतरों के बीच भारत AI, सेंसर, एंटी-ड्रोन सिस्टम और स्मार्ट सर्विलांस जैसी तकनीकों से सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है.

विज्ञापन

Border Security: पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश से लगी सीमा पर सुरक्षा चुनौतियां अब पारंपरिक घुसपैठ से आगे बढ़ती जा रही हैं. मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, अवैध सीमा पार आवाजाही और प्रतिबंधित सामान की आवाजाही ने पूर्वी सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और जटिल बना दिया है.

विज्ञापन

बदलते खतरों के बीच सीमा सुरक्षा में तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर बढ़ रहा है. भारत पारंपरिक निगरानी और मानवबल के साथ ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, स्वायत्त प्लेटफॉर्म और नेटवर्क आधारित कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम जैसी तकनीकों को शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लगभग 2,200 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है. इसका बड़ा हिस्सा घनी आबादी वाले क्षेत्रों, नदियों, कृषि भूमि और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से होकर गुजरता है. कुछ इलाकों में वैध सीमा-पार आवाजाही भी अधिक है, जिससे लगातार निगरानी करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब चुनौती केवल किसी व्यक्ति द्वारा सीमा बाड़ पार करने का पता लगाने तक सीमित नहीं है. छोटे मानवरहित हवाई सिस्टम के जरिए मादक पदार्थों की आवाजाही, सीमा के दूरदराज इलाकों का इस्तेमाल करने वाले तस्करी नेटवर्क और निगरानी से बचने के लिए अलग-अलग मार्गों व आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करने वाले आपराधिक समूह नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं.

इसी वजह से भारत की व्यापक ‘स्मार्ट बॉर्डर’ पहल में पूर्वी सीमा को महत्वपूर्ण स्थान मिला है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी सीमाओं पर लगभग 6,000 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करने वाली राष्ट्रव्यापी स्मार्ट बॉर्डर परियोजना की योजना की घोषणा की है. इसमें ड्रोन, रडार और इंटेलिजेंट सर्विलांस सिस्टम जैसी तकनीकों को शामिल किए जाने की उम्मीद है.

इसी पृष्ठभूमि में हैदराबाद स्थित रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी Zen Technologies ने Integrated Smart Border Suite (ISBS) पेश करने की घोषणा की है. यह प्रणाली उच्च जोखिम वाले सीमा क्षेत्रों में निगरानी, पहचान और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए कई तकनीकों को एक साथ जोड़ती है.

ISBS में AI आधारित एंटी-ड्रोन तकनीक, इंटरसेप्टर ड्रोन, मानवरहित ग्राउंड व्हीकल, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और थर्मल सर्विलांस सिस्टम, रिमोटली ऑपरेटेड वेपन स्टेशन तथा लोइटरिंग सिस्टम शामिल हैं.

इस प्रणाली का मुख्य जोर अलग-अलग सेंसर या प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने के बजाय एकीकृत निगरानी और प्रतिक्रिया नेटवर्क तैयार करने पर है. ऐसे क्षेत्र, जहां भू-भाग, वनस्पति, जलमार्ग और बस्तियों के कारण लगातार भौतिक निगरानी मुश्किल होती है, वहां यह मॉडल विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है.

भारत की सीमाओं पर ड्रोन भी सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरे हैं. इन मानवरहित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल निगरानी के साथ-साथ प्रतिबंधित सामान की आवाजाही के लिए भी किया जा सकता है. एकीकृत प्रणाली सुरक्षा कर्मियों को ऐसी गतिविधियों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने में मदद कर सकती है, इससे पहले कि वे आबादी वाले या रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंचें.

व्यापक उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें संदिग्ध गतिविधियों का वास्तविक समय में पता लगाया जा सके, उन्हें ट्रैक और आकलन किया जा सके. इससे सुरक्षा बलों को तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी और हर संवेदनशील क्षेत्र में लगातार भौतिक गश्त पर निर्भरता कम हो सकती है.

Zen Technologies के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर अशोक अटलुरी ने कहा, “भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था में बुनियादी बदलाव हो रहा है. यह बदलाव स्थिर और मानवबल पर अधिक निर्भर तैनाती से आगे बढ़कर ऐसी इंटेलिजेंट, स्वायत्त और तकनीक आधारित सुरक्षा प्रणालियों की ओर है, जो वास्तविक समय में बदलते और असममित खतरों का सामना कर सकें.”

पश्चिम बंगाल के लिए इन सुरक्षा उपायों का महत्व और अधिक है, क्योंकि बांग्लादेश से लगी सीमा केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी से भी जुड़ी हुई है. इसलिए सीमा पार अनधिकृत आवाजाही को रोकना अब कानून-व्यवस्था के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता के रूप में भी देखा जा रहा है.

हालांकि, तकनीक से सीमा सुरक्षा कर्मियों की भूमिका खत्म होने की संभावना नहीं है. इसके बजाय उभरता मॉडल मानव निर्णय क्षमता को लगातार निगरानी और स्वचालित पहचान प्रणालियों के साथ जोड़ने पर आधारित है. इससे सुरक्षा बलों को बड़े और कठिन निगरानी वाले क्षेत्रों में बेहतर स्थिति-जागरूकता मिल सकती है.

भारत जैसे-जैसे तकनीक आधारित सीमा सुरक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का अनुभव यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि AI, स्वायत्त प्रणालियों और नेटवर्क आधारित निगरानी तकनीकों को तेजी से बदलते, विकेंद्रीकृत और पारंपरिक तरीकों से आसानी से पता न चलने वाले खतरों के खिलाफ कितनी प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है.

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola