डायबिटीज रोकने के लिए दौड़ेगा कोलकाता
कोलकाता: भारत में डायबिटीज (शुगर) रोग जिस तेजी से फैलता जा रहा है, उसे देखते हुए भारत को डायबिटीज की राजधानी तक कहा जाने लगा है. विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज का मुकाबला करने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है. इस खतरनाक व जानलेवा रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 14 नवंबर को […]
कोलकाता: भारत में डायबिटीज (शुगर) रोग जिस तेजी से फैलता जा रहा है, उसे देखते हुए भारत को डायबिटीज की राजधानी तक कहा जाने लगा है. विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज का मुकाबला करने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है. इस खतरनाक व जानलेवा रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 14 नवंबर को वार्षिक कोलकाता वाकाथॉन का आयोजन होगा.
चौथे कोलकाता मैराथन में हजारों लोग हिस्सा लेंगे. एक संवाददाता सम्मेलन में इसकी घोषणा करते हुए इवेंट मैनेजमेंट ग्रुप (इएमजी) के सीइओ कृष्णोंदु बनिक ने बताया कि 14 नवंबर को सबेरे साढ़े सात बजे विक्टोरिया मेमोरियल से यह दौड़ शुरू होगी, जिसमें स्कूल के बच्चे, कॉरपोरेट हाउस के प्रतिनिधि से लेकर समाज के हर वर्ग के लोग भाग लेंगे. बड़ी संख्या में सेलिब्रिटी भी कोलकाता वाकथॉन में शामिल होंगे. मजे की बात है कि इस दौड़ का उदघाटन चार स्कूली बच्चों के हाथों होगा.
मौके पर मौजूद वेस्ट बंगाल फेडरेशन ऑफ यूनाइटेड नेशंस के सीताराम शर्मा ने कहा कि जिस तेजी से यह बीमारी बढ़ रही है, उससे स्थिति बेहद खतरनाक बन गयी है. लाइफ स्टाइल में आया बदलाव इस रोग के बढ़ने का कारण है. इससे बचने के लिए हमें कसरत, योगा इत्यादि का रूख करना होगा. वहीं सीएमआरआइ के सीइओ सुयेश बोरार ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि डायबिटीज एक बहुत बड़ा खतरा बन गया है. इससे बचने के लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है. 14 नवंबर को सीएमआरआइ में एक डायबिटीज चेकअप कैंप आयोजित किया जायेगा. मशहूर चिकित्सक डा. देवाशीष बसु ने कहा कि डायबिटीज का फिलहाल कोई इलाज नहीं निकला है. इसका सबसे बढ़िया इलाज यह है कि इसे पनपने से पहले ही रोकना होगा. उसके लिए लोगों को जागरूक करना सबसे जरूरी है.
डॉ बसु ने बताया कि यह बड़े अफसोस की बात है कि भारत में एचआइवी रोगियों की संख्या केवल 2.4 मिलियन है. इसके बावजूद सभी सरकारें इस रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती हैं. पर वहीं डायबिटीज रोगियों की तादाद करोड़ों में पहुंचने के बावजूद सरकार की ओर से कुछ भी नहीं किया जा रहा है. इस रोग से मुकाबले कि लिए कॉरपोरेट घरानों के आगे आने की सख्त जरूरत है.
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