कोलकाता के रेडलाइट इलाके में पहली बार दुर्गापूजा

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कोलकाता : दुर्गापूजा पंडालों से बहिष्कृत सोनागाछी के यौनकर्मियों ने समाज के पूर्वाग्रहों के बंधनों को तोड़ते हुए पहली बार अपनी अलग पूजा का आयोजन किया है. यौनकर्मियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली दरबार महिला समन्वय समिति की भारती डे ने प्रेस ट्रस्ट को बताया, ‘‘यह बंगालियों का सबसे बड़ा त्यौहार है और […]

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कोलकाता : दुर्गापूजा पंडालों से बहिष्कृत सोनागाछी के यौनकर्मियों ने समाज के पूर्वाग्रहों के बंधनों को तोड़ते हुए पहली बार अपनी अलग पूजा का आयोजन किया है.

यौनकर्मियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली दरबार महिला समन्वय समिति की भारती डे ने प्रेस ट्रस्ट को बताया, ‘‘यह बंगालियों का सबसे बड़ा त्यौहार है और जब बाकी पूरा शहर इसका जश्न मना रहा है तो फिर हम क्यों पीछे रहें ? इसलिए हमने इस बार अपना अलग पूजा पंडाल बनाने की सोची.’’लेकिन इन यौनकर्मियों को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा जब कोलकाता पुलिस ने फुटपाथ के एक हिस्से का अतिक्रमण करने वाले उनके पंडाल को अनुमति नहीं दी.

यौनकर्मियों ने इसे कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी और पूजा का आयोजन करने की अनुमति ले ली.डे ने कहा, ‘‘हमारा बजट 2 लाख रुपए का था.’’इस पूजा के लिए सोनागाछी के 7 हजार यौनकर्मियों ने प्रति व्यक्ति 20 रुपए का योगदान दिया जबकि कुछ स्वयंसेवियों ने भी इसमें योगदान दिया। सोनागाछी उत्तर कोलकाता में एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट इलाका है.

कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘हम सभी धार्मिक परंपराओं का पालन कर रहे हैं. हमारे कर्मचारियों में से एक ब्राह्मण पूजा करने के लिए तैयार हो गया है. हमने दो ढाकियों(ड्रम वादकों )को भी नियुक्त किया है.’’आज से शुरु होने वाले चार दिवसीय समारोह के लिए दुर्गा की छह फीट उंची मूर्ति की रखी गई है.

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