नशाखुरानों के लिए खौफ बना पीटर

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कोलकाता: रेलवे प्रशासन की रातों की नींद उड़ा देने वाले नशाखुरानों के लिए एक नाम खौफ का पर्याय बना हुआ है. जब वह स्टेशनों पर चहलकदमी करता है तो शातिर से शातिर अपराधी के हौसले पस्त हो जाते हैं. वह आरपीएफ या रेलवे पुलिस का कोई इंस्पेक्टर नहीं, बल्कि पूर्व रेलवे के डॉग स्क्वार्ड में […]

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कोलकाता: रेलवे प्रशासन की रातों की नींद उड़ा देने वाले नशाखुरानों के लिए एक नाम खौफ का पर्याय बना हुआ है. जब वह स्टेशनों पर चहलकदमी करता है तो शातिर से शातिर अपराधी के हौसले पस्त हो जाते हैं. वह आरपीएफ या रेलवे पुलिस का कोई इंस्पेक्टर नहीं, बल्कि पूर्व रेलवे के डॉग स्क्वार्ड में शामिल खोजी कुत्ता पीटर है. पीटर कोई आम कुत्ता नहीं है, क्योंकि आम तौर पर खोजीकुत्तोंका इस्तेमाल विस्फोटक खोजने या फिर अपराधियों को पकड़ने में किया जाता है.

लेकिन पीटर भारतीय रेलवे का पहला खोजी कुत्ता है, जिसे नशे की गोलियों व नशाखुरानों को पकड़ने के लिए ही तैयार किया गया है. पूर्व रेलवे के पायलट प्रोजेक्ट के तहत लिलुआ स्थित आरपीएफ मुख्यालय में डॉग ट्रेनिंग सेंटर में पीटर को पिछले साल प्रशिक्षण दिया गया. उसे एक साल तीन महीने के कड़े प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा. उसे तीन महीने तक नशे की गोलियों को सूंघ कर पकड़ने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. प्रशिक्षण के बाद आरपीएफ के अधिकारियों ने पीटर की परीक्षा ली. परीक्षण में पास होने पर उसे 2012 में हावड़ा डिवीजन में नियुक्ति मिली. उसकी सफलता को देखते हुए जैंगो नामक एक और कुत्ते को भी नशाखुरानों को पकड़ने के लिए ट्रेंड किया गया. उसे सियालदह डिवीजन में तैनात कर दिया गया है.

पीटर के पांच साथी भी हैं
हावड़ा डिवीजन के डॉग सेल में कुल छह खोजी कुत्ते हैं. उनके नाम जैक्स, सीजर, विक्टर, मैक्स और पीटर हैं. हर कुत्ते का अलग-अलग काम है. पीटर जहां नशाखुरानों की तलाश करने में माहिर है, वहीं जैक्स, मैक्स और विक्टर का काम हावड़ा डिवीजन के विभिन्न स्टेशनों व ट्रेनों में विस्फोटकों व हथियारों का पता लगाना है, जबकि सीजर का काम चोर व अपराधियों को ट्रैक करना (सूंघ कर खोजना) है. इसके साथ ही रेलवे की संपत्ति को चोरों से सुरक्षित रखना भी उनका काम है.

पीटर का वेतन पांच हजार रुपये
पीटर को उसके काम के एवज में पांच हजार मेहनताना भी दिया जाता है. हालांकि आम लोगों को विश्वास न हो, लेकिन यह सही है. रेलवे के अन्य कर्मचारियों की तरह मिलनेवाली पीटर की सैलरी को उसके खाने-पीने पर खर्च किया जाता है. पीटर की देख-रेख के लिए बकायदा एक सिपाही की नियुक्ति भी की गयी है.

पीटर की टीम में 18 सिपाही व दो इंस्पेक्टर
हावड़ा डिवीजन -1 में नशाखुरानी से निपटने के लिए ड्रगिंग सेल बनाया गया है. इस सेल ने अब तक कई नशाखुरानी गिरोह के अपराधियों को पकड़ा है. सेल में 18 सिपाही व दो इंस्पेक्टर शामिल हैं. हालांकि सेल में पीटर के शामिल होने से सेल को एक नई ऊर्जा मिली है. लेकिन पीटर से खौफजदा नशाखुरानी गिरोह ने भी अपना पैतरा बदलना शुरू कर दिया है. गिरोह के लोगों ने नशे की गोली सूंघने में पारंगत पीटर का तोड़ भी निकाल लिया है. अब गिरोह के लोग नशे के गोली के स्थान पर अन्य नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करने लगे हैं.

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