कोलकाता: आजादी की लड़ाई में अहम रोल अदा करने वाले हमारे पूर्वजों ने देश के लिए अपना कतरा-कतरा कुरबान कर दिया. आज देश का कोई ऐसा हिस्सा नहीं, जहां मुसलमानों का रक्त न गिरा हो. यह हमारे शहीद पूर्वजों की भूमि है और मुसलमानों के लिए पूरी दुनिया में हिंदुस्तान से बेहतर दूसरा कोई देश नहीं हो सकता.
यह कहना है जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जनरल सेक्रेटरी मौलाना महमूद मदनी का. वह शनिवार को कोलकाता के शहीद मीनार मैदान में विभिन्न मसलों को लेकर जमीयत की ओर से आयोजित सभा में बोल रहे थे. मौलाना मदनी ने बर्दवान विस्फोट का जिक्र किये बगैर कहा कि आज मदरसों पर सवाल खड़ा किया जा रहा है. दोहरा रवैये के बाद भी देश के मुसलमान यदि दहशतगर्द नहीं बने तो उसके पीछे मदरसे थे. मदरसों के उलेमा के चलते मुसलमान देश के साथ खड़ा है. हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए मौलाना मदानी ने इसलाम को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मजहब बताते हुए कहा कि इसलाम को अपने युवाओं पर भरोसा है.
उन्होंने देश के मुसलमानों से आग्रह करते हुए कहा कि वे अगले 20 साल तक शिक्षा-शिक्षा और सिर्फ शिक्षा को एजेंडा बनायें और अपने बच्चे-बच्चियों को शिक्षित करें.
सभा में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश सचिव सिद्दीकुला चौधरी ने ऐतिहासिक तथ्य देकर भारत के मुसलमानों को देश भक्त करार देते हुए कहा कि बर्दवान विस्फोट कांड के तार मदरसों से जोड़ा जा रहा है जिसकी हम निंदा करते हैं. उन्होंने राजनीतिक दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि कहने को तो हर पार्टी अपने को मुसलमानों का हितैषी कहती है, लेकिन निमंत्रण देने के बाद भी किसी प्रमुख दल के नेता ने इस जलसे में शिरकत नहीं की.
इस दौरान मुफ्ती रफीकुल इसलाम ने कहा कि देश के कुछ राजनीतिक दल मुसलमानों के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने मीडिया पर भी पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि मदरसों के खिलाफ दुषप्रचार किया जा रहा है. लेकिन आप इतना जान लें कि मदरसों का इतिहास 1448 वर्ष पुराना है. विश्व में बर्बरता खत्म करने के लिए मदरसों ने काम किया. उन्होंने राजनीतिक दलों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि देश में जहर खोलने वाली पार्टियां इतना समझ लें कि हम बंगाल में किसी भी ऐसे दल को प्रवेश नहीं करने देंगे जो दंगों की राजनीति करती हो.