राज्य सरकार ने तैयार की शहरी विकास नीति
कोलकाता: महानगर में आवासन समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने शहरी विकास नीति बनायी है, जिसके तहत यहां रियल की एस्टेट कंपनियों को कई प्रकार की छूट देने का फैसला किया गया है. अब यहां ग्रीन बिल्डिंग बनानी वाली कंपनियों को अतिरिक्त फ्लोर एरिया का सैंक्शन दिया जायेगा, इसके साथ-साथ जजर्र व […]
कोलकाता: महानगर में आवासन समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने शहरी विकास नीति बनायी है, जिसके तहत यहां रियल की एस्टेट कंपनियों को कई प्रकार की छूट देने का फैसला किया गया है.
अब यहां ग्रीन बिल्डिंग बनानी वाली कंपनियों को अतिरिक्त फ्लोर एरिया का सैंक्शन दिया जायेगा, इसके साथ-साथ जजर्र व पुराने मकानों को तोड़ कर नये बिल्डिंग बनाने पर भी राज्य सरकार ने 100 प्रतिशत फ्लोर एरिया सैंक्शन देने का फैसला किया है. मंगलवार को राज्य सचिवालय में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया. बैठक के बाद राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्र व शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने बताया कि शहर में जिस प्रकार से जनसंख्या बढ़ रही है, ऐसे में आनेवाले समय में यहां आवासन की समस्या देखने को मिल सकती है. वर्ष 2001 से 2011 तक देश के अन्य मेट्रोपॉलिटन शहरों में जनसंख्या 27 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जबकि कोलकाता में यह मात्र 31 प्रतिशत है.
इसलिए राज्य सरकार ने आवासीय समस्या को दूर करने के लिए यह नीति तैयार की है. ग्रीन बिल्डिंग निर्माण करने पर अतिरिक्त फ्लोर एरिया और जजर्र मकानों को तोड़ कर बिल्डिंग बनाने पर 100 प्रतिशत का फ्लोर एरिया का सैंक्शन दिया जायेगा. साथ ही राज्य सरकार ने रियल एस्टेट कंपनियों को यह भी निर्देश दिया है कि उनके द्वारा ली गयी जमीन पर अगर पहले से किरायेदार हैं तो नये बिल्डिंग के निर्माण के बाद उनको मुफ्त में उनका स्थान वापस देना होगा. उन्होंने बताया कि कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में अगले छह माह व नगरपालिका क्षेत्र में अगले एक वर्ष के अंदर यह नियम लागू कर दिया जायेगा और इसके तहत ही सभी आवासीय योजनाएं तैयार की जायेंगी.
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