वाराणसी के मैनहोल में ऐसा क्या मिला? गाद की जगह निकलीं बालू की बोरियां, नगर निगम ने जताई साजिश की आशंका

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वाराणसी में सीवर जाम की साजिश? मैनहोल से निकलीं बालू की बोरियां

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UP News: वाराणसी के कई वार्डों में जलभराव की समस्या के बीच सीवर लाइनों की सफाई के दौरान बालू की बोरियों और प्लास्टिक के मलबे का मिलना चौंकाने वाला है. नगर निगम ने इसे जानबूझकर की गई साजिश करार दिया है.

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UP News: वाराणसी में बारिश के बाद जलभराव की वजह तलाशने के लिए सीवर की सफाई कराई गई तो मैनहोल के अंदर का नजारा देखकर नगर निगम के अधिकारी हैरान रह गए. शिवाला, सरायनंदन और नगवा समेत कई वार्डों में मुख्य सीवर लाइन के अंदर बालू की बोरियां, लकड़ी का बुरादा, पत्थर, प्लाई और प्लास्टिक की सामग्री मिलने का दावा किया गया है. नगर निगम ने आशंका जताई है कि किसी ने जानबूझकर सीवर लाइन को चोक करने की कोशिश की. मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR की तैयारी है.

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जलभराव की वजह तलाशने पर खुला मामला

वाराणसी में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई थी. सड़कों और गलियों में पानी जमा होने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी सामने आईं. इसके बाद नगर निगम ने जलभराव वाले इलाकों में सीवर और मैनहोल की सफाई कराई. इसी दौरान सीवर के अंदर बालू की बोरियां और अन्य सामग्री मिलने का दावा किया गया. नगर निगम के मुताबिक, मुख्य सीवर लाइन में यह सामग्री जमा होने से पानी की निकासी प्रभावित हुई. इसके चलते आसपास की गलियों में सीवर का पानी ओवरफ्लो होने लगा.

शिवाला से नगवा तक मिले बालू के बोरे

नगर निगम के अनुसार, शिवाला, सरायनंदन, नगवा समेत करीब आधा दर्जन वार्डों में मुख्य सीवर लाइनों की सफाई कराई गई. सफाई के दौरान बालू की बोरियों के अलावा लकड़ी का बुरादा, पत्थर, प्लाई और प्लास्टिक की सामग्री मिलने की बात सामने आई है. नगर निगम का दावा है कि इस सामग्री के कारण सीवर लाइन चोक हुई और जल निकासी प्रभावित हुई. हालांकि, यह सामग्री सीवर के अंदर कैसे पहुंची, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी.

नगर निगम ने जताई जानबूझकर सीवर चोक करने की आशंका

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि जलभराव की समस्या सामने आने के बाद सीवर की सफाई कराई गई. इस दौरान मैनहोल के अंदर कई बोरी मलबा मिला. उन्होंने आशंका जताई कि किसी ने जानबूझकर मैनहोल को चोक करने का प्रयास किया है. नगर आयुक्त ने कहा कि शरारत करने वालों के खिलाफ नगर निगम की ओर से FIR दर्ज कराई जाएगी.

मेयर और नगर आयुक्त ने किया मौके का निरीक्षण

शनिवार को मेयर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने पार्षदों और अधिकारियों के साथ शिवाला वार्ड में अग्रवाल रेडियो के पास मौके का निरीक्षण किया. मेयर ने बताया कि कई जगह वॉटर लॉगिंग की समस्या की जांच कराई गई. जांच के दौरान मुख्य सीवर लाइन में बालू की बोरियां भरी मिलने की बात सामने आई. उन्होंने कहा कि पिछले करीब 10 दिनों से वाराणसी नगर निगम और जलकल को बदनाम करने की कोशिश का अभियान देखने को मिला है. विपक्षी दलों की साजिश के सवाल पर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं होने की बात कही. उन्होंने यह भी कहा कि अगले छह महीने में वाराणसी में सीवर और जल निकासी की समस्या पूरी तरह खत्म करने का प्रयास किया जाएगा.

नगवा में भी चेंबर के अंदर मिले बालू के बोरे

नगवा वार्ड के भाजपा पार्षद ने बताया कि उनके क्षेत्र में भी वॉटर लॉगिंग की समस्या की जांच कराई गई थी. उनके मुताबिक, कई जगह चेंबर के अंदर बालू की बोरियां मिलीं. उन्होंने कहा कि इसके पीछे की गई किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा. पार्षद ने बताया कि क्षेत्र में करीब 100 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट पास है. बारिश के बाद इसका काम शुरू होने की बात कही गई है. उन्होंने कहा कि जांच के बाद इस तरह का काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस को दी गई तहरीर, अब जांच पर नजर

नगर निगम प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है. अधिकारियों के मुताबिक, अज्ञात अराजक तत्वों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए पुलिस को लिखित तहरीर दी गई है. अब जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि सीवर लाइन के अंदर बालू की बोरियां और दूसरी सामग्री कैसे पहुंची. साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि इसके पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका थी या नहीं.फिलहाल नगर निगम इसे सीवर चोक करने की जानबूझकर की गई कोशिश की आशंका के तौर पर देख रहा है.

छह महीने में समस्या खत्म करने का दावा

मेयर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि अगले छह महीने में वाराणसी में सीवर और जल निकासी की समस्या को पूरी तरह खत्म करने का प्रयास किया जाएगा. वहीं, नगर निगम की ओर से जलभराव वाले इलाकों में सीवर सफाई और जल निकासी की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है. अब सीवर में मिली बताई जा रही बालू की बोरियों और मलबे की जांच महत्वपूर्ण होगी. जांच के बाद ही साफ होगा कि यह सामग्री वहां कैसे पहुंची और इसके पीछे आखिर किसकी भूमिका थी.

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