बस्ती SO सुसाइड मिस्ट्री: थानेदार की मौत का 'डार्क सीक्रेट' आउट, हनीट्रैप के खेल में फंसी खाकी... जानिए कौन था मास्टरमाइंड?

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थानेदार की मौत का 'डार्क सीक्रेट' आउट (AI Generated)

UP Crime News: उत्तर प्रदेश के बस्ती में थानाध्यक्ष की संदिग्ध मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है. प्रारंभिक जांच और परिजनों की शिकायत के अनुसार, यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था जिसमें अधिकारी हनीट्रैप का शिकार हुए थे. अब आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है.

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UP Crime News: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में स्थित वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच और परिजनों की लिखित शिकायत से यह साफ हो चुका है कि यह कोई सामान्य घटना नहीं थी. थानाध्यक्ष एक सोची-समझी साजिश के तहत हनीट्रैप का शिकार हुए थे. आरोपियों द्वारा लगातार की जा रही ब्लैकमेलिंग और प्रताड़ना से तंग आकर ही उन्होंने यह दुखद कदम उठाया था.

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आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर और कानूनी कार्रवाई

इस सनसनीखेज मामले में मृतक अधिकारी के पुत्र संदीप सिंह की ओर से स्थानीय थाने में एक विस्तृत नामजद शिकायत दर्ज कराई गई है. परिजनों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रियंका चौधरी, उनके पिता रामनयन चौधरी तथा अधिवक्ता विजय यादव के खिलाफ गंभीर कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. एक जिम्मेदार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का इस तरह अपराधियों के षड्यंत्र में फंस जाना पूरी प्रशासनिक व्यवस्था तथा सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है.

घटनाक्रम की पृष्ठभूमि और सरकारी आवास में शव बरामदगी

मूल रूप से आजमगढ़ जिले के भीलमपुर छपरा गांव निवासी पचास वर्षीय सूर्य प्रकाश सिंह बस्ती के वाल्टरगंज में थानाध्यक्ष पद पर कार्यरत थे. बीते दिनों कलेक्ट्रेट स्थित उनके शासकीय आवास में उनका शव फांसी के फंदे से लटकता हुआ बरामद किया गया था. इस अप्रत्याशित घटना के बाद से ही महकमे में भारी हड़कंप मच गया था और तरह-तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं. अब बेटे द्वारा प्रस्तुत कानूनी दस्तावेज ने पूरे मामले की सच्चाई को पारदर्शी तरीके से सामने रख दिया है.

षड्यंत्र का तरीका और आरोपियों की गिरफ्तारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी महिला प्रियंका चौधरी अपने पति से अलग होकर मायके में रह रही थी. उसने अपने पिता तथा साथी अधिवक्ता के साथ मिलकर थानाध्यक्ष को फंसाने की योजना बनाई थी. लगातार मिल रही धमकियों, आर्थिक शोषण और सामाजिक सम्मान खोने के भय से अधिकारी बेहद तनाव में थे. इसी मानसिक दबाव के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली; फिलहाल पुलिस की विशेष टीमें तीनों नामजद आरोपियों को हिरासत में लेकर गहनता से पूछताछ करने में जुटी हुई हैं.

साइबर सेल और पुलिस विभाग की आगे की जांच

पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं. जांच टीम आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल्स तथा डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है ताकि इस हनीट्रैप गिरोह के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके. प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि कानून के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. घटना की निष्पक्ष जांच कर सभी आरोपियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिले.

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