"न्याय के लिए तड़प रहे पीड़ित", ऊना कांड में 35 आरोपियों के छूटने पर मायावती ने जताई चिंता, हाईकोर्ट जाने की अपील

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बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती (AI सांकेतिक तस्वीर)

UP News: बसपा प्रमुख मायावती ने गुजरात के ऊना दलित अत्याचार मामले में स्थानीय अदालत द्वारा अधिकांश आरोपियों को बरी किए जाने पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने गुजरात सरकार से पीड़ितों को हाईकोर्ट में न्याय दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी करने की मांग की है.

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UP News: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में वर्ष 2016 में हुए चर्चित दलित अत्याचार मामले में स्थानीय अदालत द्वारा अधिकांश आरोपियों को बरी किए जाने पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को हाईकोर्ट में न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए आर्थिक और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. मायावती ने गुजरात सरकार से इस मामले में प्रभावी पैरवी कर दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग की है.

ऊना कांड के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग

मायावती ने सोशल मीडिया X पर कहा कि ऊना दलित अत्याचार मामले में स्थानीय अदालत द्वारा मार्च 2026 में लगभग सभी आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने के लिए पीड़ित परिवार संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वित्तीय और अन्य कठिनाइयों के कारण पीड़ितों के सामने न्याय प्राप्त करना बड़ी चुनौती बन गया है. इस स्थिति से विशेष रूप से बहुजन समाज के लोगों में गहरी चिंता व्याप्त है.

'मैं खुद पीड़ित परिवारों से मिलने गई थी'

बसपा प्रमुख ने कहा कि इस मामले से उनकी चिंता इसलिए भी जुड़ी है क्योंकि घटना के बाद वह स्वयं ऊना जाकर पीड़ित परिवारों से मिली थीं और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली थी. इसके बाद उन्होंने गुजरात सरकार से सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी. मायावती ने कहा कि देशभर में इस घटना को लेकर व्यापक आक्रोश देखने को मिला था, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश आरोपियों का बरी हो जाना दलितों के हितों और उनकी सुरक्षा के प्रति सरकारी उदासीनता को दर्शाता है.

सरकारी खर्च पर वकील उपलब्ध कराने की भी मांग

मायावती ने गुजरात सरकार से अपील की कि वह इस मामले में अपनी गलती सुधारते हुए हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करे, ताकि दोषियों को सख्त सजा मिल सके और पीड़ित परिवारों को न्याय प्राप्त हो. उन्होंने यह भी मांग की कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों को उनकी संतुष्टि के अनुसार सरकारी खर्च पर वकील उपलब्ध कराए. मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार के दौरान गरीबों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता का प्रावधान किया गया था और इसी तरह की व्यवस्था गुजरात में भी की जानी चाहिए.

क्या है ऊना दलित अत्याचार मामला?

11 जुलाई 2016 को गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना के मोटा समधियाला गांव में चार दलित युवकों को कथित गौरक्षकों ने सार्वजनिक रूप से बेरहमी से पीटा था. आरोप था कि ये युवक गाय की हत्या कर रहे थे, जबकि पीड़ितों का कहना था कि वे पहले से मरी हुई गाय की खाल उतार रहे थे, जो उनका पारंपरिक काम था. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया और गुजरात समेत कई राज्यों में दलित समुदाय ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए. मामले की जांच के बाद 40 आरोपियों पर मुकदमा चला. मार्च 2026 में गिर सोमनाथ की एक अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराया, जबकि 35 अन्य को बरी कर दिया. इसके खिलाफ पीड़ित पक्ष ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया है.

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कोमल अग्रवाल पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. वे डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और विभिन्न विषयों पर समाचार एवं लेख लिखती हैं. इससे पहले उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में इंटर्नशिप एवं कार्य अनुभव प्राप्त किया है, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और वीडियो एडिटिंग जैसे क्षेत्रों में काम किया. उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज से जनसंचार एवं पत्रकारिता की पढ़ाई की है. कोमल तथ्यपरक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित पत्रकारिता में विश्वास रखती हैं तथा सरल, सटीक और प्रभावी समाचार लेखन को प्राथमिकता देती हैं.

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