त्योहारों से पहले यूपी में महंगाई का बड़ा झटका! प्याज ने बदला रसोई का हिसाब, तेल-दाल भी महंगी, वजह जानकर चौंकेंगे
कमजोर बारिश से सप्लाई पर असर की आशंका
UP Inflation: यूपी में त्योहारी सीजन से पहले महंगाई ने जोर पकड़ा है. तेल, दाल और प्याज जैसी रोजमर्रा की चीजें महंगी हो गई हैं, जिससे घरेलू बजट पर भारी दबाव है.
UP Inflation: उत्तर प्रदेश में त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले महंगाई ने घरेलू बजट की चिंता बढ़ा दी है. रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम पिछले साल की तुलना में ऊपर चले गए हैं. खास तौर पर खाद्य तेल, दाल और प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ रहा है. नवरात्र और दशहरा जैसे त्योहारों के बीच बढ़ती कीमतों ने लोगों की रसोई का हिसाब और मुश्किल कर दिया है.
खाद्य तेलों की कीमत में दिखी बड़ी तेजी
रसोई के बजट पर सबसे ज्यादा असर खाद्य तेलों की कीमतों में बदलाव से दिखाई दे रहा है. आंकड़ों के मुताबिक मूंगफली तेल का औसत खुदरा भाव पिछले साल 186.93 रुपये प्रति किलो था, जो बढ़कर 208.44 रुपये हो गया है. इसी तरह सूरजमुखी तेल 161.40 रुपये से बढ़कर 192.56 रुपये और सोया तेल 147.14 रुपये से बढ़कर 166.73 रुपये प्रति किलो पहुंच गया. पाम तेल की कीमत भी 132.98 रुपये से बढ़कर 151.40 रुपये प्रति किलो हो गई है.
प्याज के दाम ने बढ़ाई सबसे ज्यादा चिंता
रसोई में हर दिन इस्तेमाल होने वाली प्याज की कीमत में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है. 20 सितंबर को प्याज का औसत खुदरा भाव 54.23 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 25.97 रुपये प्रति किलो था. यानी एक साल में प्याज की कीमत लगभग दोगुने स्तर तक पहुंच गई. टमाटर के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है और इसकी कीमत 36.48 रुपये से बढ़कर 39.16 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई.
अरहर समेत कई दालें हुईं महंगी
तेल और सब्जियों के साथ दालों की कीमतों ने भी घरेलू बजट पर दबाव बढ़ाया है. अरहर दाल का औसत खुदरा भाव पिछले साल 113.66 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर 124.23 रुपये प्रति किलो हो गया है. इसके अलावा चना, उड़द, मूंग और मसूर की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे रोजाना के भोजन की लागत बढ़ने की स्थिति बन रही है.
कमजोर बारिश से सप्लाई पर असर की आशंका
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी के पीछे कमजोर मानसून को भी एक वजह माना जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार 17 सितंबर तक देश में सामान्य से करीब 15 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन पर पड़ने की आशंका है. यदि उत्पादन और सप्लाई प्रभावित होती है तो आने वाले समय में सब्जियों और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बना रह सकता है.
विदेशों से आने वाला पाम तेल भी बना वजह
भारत अपनी वनस्पति तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम तेल की कीमतों में होने वाला बदलाव घरेलू बाजार को भी प्रभावित करता है. इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में बायोफ्यूल की मांग बढ़ने से पाम तेल की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव की स्थिति बनी हुई है. रूस-यूक्रेन युद्ध और काला सागर क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों का असर भी वैश्विक खाद्य तेल बाजार पर बताया जा रहा है.
त्योहारों से पहले परिवारों की बढ़ी चिंता
उत्तर प्रदेश में नवरात्र, दशहरा और इसके बाद आने वाले त्योहारों के बीच खाद्य वस्तुओं के बढ़ते दाम घरेलू बजट के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं. तेल, दाल, प्याज और सब्जियां रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा हैं, इसलिए इनके दाम में मामूली बढ़ोतरी भी महीने के कुल खर्च को प्रभावित करती है. अब लोगों की नजर आने वाले दिनों में बाजार की सप्लाई और कीमतों पर है कि त्योहारों के बीच रसोई के बजट को राहत मिलती है या महंगाई का दबाव और बढ़ता है. यह भी देखें: 1 अक्टूबर से बदल सकती है जमीन-मकान की कीमत! इस जिले में सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी मे सरकार, खरीदारी से पहले जान लें पूरा अपडेट
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