सिफारिश पर मिली थी 125 लोगों को नौकरी, फिर कुंभ में सबसे ज्यादा खजाना उड़ा ले गई जीजा-साले की जोड़ी

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अयोध्या राम मंदिर

Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में सामने आया है कि कुंभ मेले के दौरान सबसे अधिक रकम गायब हुई. पुलिस अब आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है.

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Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नई नई जानकारी और तथ्य सामने आ रहे हैं. पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि इस पूरे मामले में सबसे अधिक रकम पर कथित रूप से जीजा-साले की जोड़ी लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा ने हाथ साफ किया. इन दोनों पर आरोप है कि चोरी की गई रकम से उन्होंने कई संपत्तियां खरीदीं. जांच एजेंसियां अब उनके वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की विस्तृत जांच कर रही हैं. मामले में कई अन्य आरोपियों की भूमिका भी सामने आ रही है और पूछताछ जारी है.

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जीजा-साले की जोड़ी ने ज्यादा उड़ाया खजाना

पुलिस जांच में पता चला कि जीजा-साले की जोड़ी लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा ने मिलकर सबसे ज्यादा रकम की चोरी की और उसी पैसे से संपत्तियां भी खरीदीं. पुलिस का दावा है कि यह पूरी साजिश आठ आरोपियों ने मिलकर रची थी, लेकिन धन के बड़े हिस्से पर इन दोनों का नियंत्रण था. अब तक की जांच में इनसे जुड़ी आधा दर्जन से अधिक संपत्तियों की जानकारी सामने आई है. इन संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की भी गहन जांच की जा रही है.

कुंभ के दौरान बढ़ी चोरी की घटनाएं

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि कुंभ मेले के दौरान मंदिर में दान और चढ़ावे की राशि बढ़ने का आरोपियों ने फायदा उठाया. इससे पहले कुछ आरोपी छोटी-मोटी चोरी तक सीमित थे, लेकिन कुंभ के समय बड़ी रकम की हेराफेरी की गई. पुलिस का मानना है कि बढ़ी हुई नकदी के कारण निगरानी कमजोर रही, जिसका फायदा आरोपियों ने उठाया. इसी दौरान चोरी की कई बड़ी घटनाएं अंजाम दी गईं और रकम को धीरे-धीरे बाहर निकाला गया.

चाबी, कैमरे और चोरी की रणनीति

पुलिस की पूछताछ में यह सामने आया है कि दान गिनती कक्ष की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मचारियों के पास थी. आरोपियों ने कथित रूप से कैमरों की स्थिति को पहले से समझ लिया था और उसी के अनुसार योजना बनाई. नकदी निकालकर पहले उसे शौचालय या अन्य जगहों पर छिपाया जाता था, फिर अवसर मिलने पर बाहर ले जाया जाता था. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और सुरक्षा व्यवस्था में खामियों की जांच कर रही है.

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संपत्ति, भर्ती और वित्तीय जांच तेज

जांच एजेंसियां अब आरोपियों की संपत्तियों और बैंक लेन-देन की गहन जांच कर रही हैं. पुलिस इनकम टैक्स विभाग और अन्य एजेंसियों की मदद ले रही है ताकि मनी ट्रेल को समझा जा सके. आरोप है कि कुछ लोगों की सिफारिश से बड़ी संख्या में नियुक्तियां भी हुई थीं. एसआईटी यह भी जांच कर रही है कि ट्रस्ट से जुड़े लोगों की संपत्ति में कितनी वृद्धि हुई है और कहीं इसमें कमीशन या भ्रष्टाचार की भूमिका तो नहीं है.

यह भी पढ़ें: राम मंदिर दान चोरी मामला : पुलिस पूछताछ में आरोपी का दावा- शौचालयों में छिपाया जाता था पैसा

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