जनरल टिकट लेकर स्लीपर में बैठे यात्री, TTE ने रसीद तो दी, लेकिन 2000 रुपये एक्स्ट्रा ली? जानिए अधिक वसूली से बचने के लिए नियम
यात्रियों द्वारा ली गयी तस्वीरें
अगर आपका कन्फर्म टिकट नहीं मिला है और आप जनरल टिकट लेकर स्लीपर कोच में बैठ गए हैं, तो TTE की मनमानी झेलनी पड़ सकती है. जानिए रेलवे के नियम और अतिरिक्त किराए से कैसे बचें.
यात्रा जरूरी है और कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा? तत्काल भी फेल हो गया? ट्रेन से दिल्ली, मुंबई, भोपाल या किसी दूसरे बड़े शहर जाने वाले आम यात्रियों के सामने सबसे बड़ी समस्या तब आती है, जब यात्रा जरूरी हो और कन्फर्म टिकट न मिले. तत्काल में भी टिकट नहीं बनता और यात्रा टालना संभव नहीं होता. ऐसे में कई लोग मजबूरी में जनरल टिकट लेकर ट्रेन में सवार हो जाते हैं और स्लीपर कोच में जगह मिलने की उम्मीद में बैठ जाते हैं. यही स्थिति बलिया से भोपाल जा रहे चार यात्रियों के साथ सामने आई.
TTE की मनमानी यात्रियों पर भारी
बलिया से भोपाल जा रहे संदीप कुशवाहा, अंकिता, आयुष और गुड़िया सभी चार यात्रियों के पास जनरल टिकट था. कन्फर्म टिकट नहीं मिलने पर वे स्लीपर कोच में बैठ गए. TTE ने चारों यात्रियों के लिए Excess Fare Ticket बनाकर 2800 की वसूली की, जिसमें 800 किराया और 2000 Excess Fare दर्ज है. यात्रियों का कहना है कि उनसे 2000 अतिरिक्त लिए गए. ऐसे में सवाल है कि जनरल टिकट लेकर स्लीपर में बैठने पर रेलवे का नियम क्या है और TTE कितनी रकम वसूल सकता है? आम यात्री खुद को ऐसी स्थिति में ठगी से कैसे बचाए?
TTE ने चारों यात्रियों से लिया 2000 रुपये अधिक
बलिया से भोपाल जा रहे चार यात्रियों के पास जनरल के टिकट थे. चारों टिकट 300-300 के थे, यानी कुल 1200 रुपये का. इसके बाद TTE ने चारों यात्रियों के लिए एक Excess Fare Ticket जारी किया. इस रसीद में 800 Fare, 2000 Excess Fare और कुल 2800 दर्ज है. यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब TTE ने रसीद दी तो क्या वसूली अपने आप सही मानी जाएगी? क्या रसीद में लिखी कोई भी रकम यात्री को देनी ही होगी? जवाब है-नहीं. रसीद मिलना जरूरी है, लेकिन उसमें दर्ज रकम की गणना भी रेलवे के नियम के मुताबिक होनी चाहिए.
पहले समझिए जनरल टिकट पर स्लीपर में बैठने का नियम
अगर यात्री के पास General/Second Class का टिकट है, तो वह उसी श्रेणी में यात्रा के लिए होता है. केवल जनरल टिकट होने से यात्री को Sleeper Class में जाकर किसी खाली बर्थ पर बैठने का अधिकार नहीं मिल जाता. हालांकि, अगर यात्री गलती से या मजबूरी में उच्च श्रेणी में यात्रा कर रहा है और TTE उसे पकड़ता है, तो रेलवे के नियम में ऐसी स्थिति के लिए व्यवस्था है. रेलवे एक्ट की धारा 138(2) के तहत, निचली श्रेणी का टिकट लेकर ऊंची श्रेणी में यात्रा करने वाले यात्री से दिए गए किराये और यात्रा की गई उच्च श्रेणी के देय किराये के बीच का अंतर और Excess Charge लिया जा सकता है. यानी जनरल टिकट लेकर स्लीपर में पकड़े जाने का मतलब यह नहीं है कि TTE जो रकम मांग ले, वही देनी होगी.
TTE को पैसे लेने का अधिकार है, लेकिन हिसाब के साथ
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. TTE का अतिरिक्त किराया वसूलना हमेशा गलत नहीं है. अगर कोई यात्री General टिकट लेकर Sleeper में यात्रा कर रहा है, तो नियम के अनुसार उससे निर्धारित Fare Difference + Excess Charge लिया जा सकता है. रेलवे बोर्ड के Commercial Circular 75/2007 में भी निचली श्रेणी के टिकट के साथ उच्च श्रेणी में पकड़े गए यात्री से दोनों श्रेणियों के किराये का अंतर और निर्धारित penalty लेने की बात कही गई है.
यात्रा बहुत जरूरी है, कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा तो क्या करें?
अगर यात्रा बहुत जरूरी है और कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा है, तो यात्री RAC टिकट मिलने तक उसे प्राथमिकता दें, क्योंकि RAC पर ट्रेन में चढ़कर यात्रा की जा सकती है. अगर RAC भी उपलब्ध नहीं है, तो जनरल/अनरिजर्व्ड टिकट लेकर ट्रेन में सवार होकर TTE से उपलब्धता के आधार पर Sleeper में सीट/बर्थ देने का अनुरोध किया जा सकता है. रेलवे के नियमों में भी अनरिजर्व्ड टिकट लेकर TTE से उपलब्ध accommodation मिलने पर अपग्रेड की व्यवस्था बताई गई है. हालांकि, सिर्फ जनरल टिकट लेकर खुद से Sleeper कोच में बैठ जाना सही तरीका नहीं है. इससे अतिरिक्त किराया/चार्ज लग सकता है.
अतिरिक्त किराया क्यों लगता है?
जनरल टिकट लेकर ट्रेन की स्लीपर या अन्य आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने के दौरान टीटीई से टिकट बनवाने पर नियम के मुताबिक अतिरिक्त किराया देना पड़ सकता है. इसकी वजह यह है कि जनरल टिकट केवल अनारक्षित श्रेणी में यात्रा की अनुमति देता है. यदि यात्री स्लीपर कोच में सीट या बर्थ का उपयोग करता है, तो उसे सामान्य टिकट के किराये और संबंधित श्रेणी के किराये के बीच का अंतर देना होता है, इसके अलावा, बिना उचित आरक्षण के आरक्षित कोच में यात्रा करने पर रेलवे के नियमों के अनुसार अतिरिक्त शुल्क/जुर्माना भी लग सकता है. हालांकि, टीटीई द्वारा वसूली गई रकम का विवरण और रसीद जरूर लेना चाहिए, ताकि पता चल सके कि कितनी राशि किराये के अंतर और कितनी अन्य शुल्क के रूप में ली गई है.
TTE के द्वारा ज्यादा वसूली से कैसे बचें?
अगर आपके पास वैध General/Second Class टिकट है और TTE आपको Sleeper में यात्रा करने के लिए अतिरिक्त राशि मांगता है, तो नकद बिना रसीद पैसा न दें. TTE से साफ कहें कि रेलवे नियम के अनुसार किराये का अंतर और लागू Excess Charge की पूरी गणना करके आधिकारिक EFT/रसीद दें. रसीद में दर्ज रकम से अधिक भुगतान न करें. यदि रकम पर संदेह हो तो TTE से वसूली का आधार और गणना लिखित रूप में मांगें और जरूरत पड़ने पर ट्रेन में ही रेलवे की आधिकारिक शिकायत व्यवस्था के जरिए शिकायत करें. ध्यान रहे, General टिकट पर Sleeper में बैठना अपने-आप में अधिकृत नहीं है, इसलिए अतिरिक्त शुल्क से बचने का सही तरीका पैसा देने से बचना नहीं, बल्कि केवल नियम के मुताबिक देय राशि ही देना और उसकी रसीद लेना है.
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