मेरठ में बनेगा भारत का पहला ड्रोन रनवे, 900 एकड़ में उड़ान भरेंगे यूएवी , 371 करोड़ का टेंडर जारी
मेरठ ड्रोन रनवे
मेरठ में भारत का पहला समर्पित ड्रोन और UAV रनवे विकसित किया जाएगा.900 एकड़ में बनने वाली इस परियोजना के लिए BRO ने ₹371.15 करोड़ का टेंडर जारी किया है. रनवे पर UAV के साथ C-295 और C-130 जैसे सैन्य परिवहन विमानों के संचालन की भी योजना है.
UP News: मेरठ में देश के पहले समर्पित यूएवी और ड्रोन रनवे के निर्माण की प्रक्रिया एक कदम और आगे बढ़ गई है. सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने इसके लिए 371.15 करोड़ रुपये का नया टेंडर जारी किया है. मेरठ छावनी के किला रोड स्थित मिलिट्री फार्म की करीब 900 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित इस रनवे के लिए 25 सितंबर तक निविदाएं जमा की जा सकेंगी. 26 सितंबर को चंडीगढ़ स्थित बीआरओ के अतिरिक्त महानिदेशक (उत्तर-पश्चिम) कार्यालय में निविदाएं खोली जाएंगी.
406 करोड़ की जगह नया टेंडर
परियोजना के लिए पहले बीआरओ के मुख्य अभियंता देहरादून की ओर से 406 करोड़ रुपये का टेंडर निकाला गया था. अब उसे बदलकर 371.15 करोड़ रुपये का नया टेंडर जारी किया गया है. निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिस एजेंसी का चयन होगा, उसे सात महीने में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करनी होगी. डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण शुरू होगा. इस परियोजना को प्रोजेक्ट शिवालिक के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है.
45 मीटर चौड़ा होगा रनवे
मिलिट्री फार्म की जमीन पर बनने वाले रनवे की लंबाई 2110 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर रखी गई है. परियोजना में दो हैंगर बनाने का भी प्रावधान है. प्रत्येक हैंगर 50 मीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा होगा. इनमें विमान और ड्रोन रखने की सुविधा विकसित की जाएगी. करीब 900 एकड़ में तैयार होने वाला यह परिसर मानवरहित विमानों के संचालन के लिए अहम ढांचा होगा.
सी-295 और सी-130 का भी संचालन
रनवे पर रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट के अलावा सी-295 और सी-130 जैसे परिवहन विमानों को भी संचालित करने की योजना है. इसे भारतीय सेना के लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाना है. इसके अलावा ड्रोन के संचालन, परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए भी यहां सुविधाएं उपलब्ध होंगी.
राहत-बचाव में भी होगा इस्तेमाल
यह रनवे सिर्फ सैन्य जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा. सैन्य निगरानी के साथ ड्रोन और मानव रहित विमानों के प्रशिक्षण व परीक्षण में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा. प्राकृतिक आपदा के समय राहत और बचाव अभियान चलाने तथा दूरदराज के इलाकों में जरूरी सामग्री पहुंचाने में भी इसकी मदद ली जा सकती है. ड्रोन और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इस परियोजना को भविष्य की सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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