‘उर्दू पढ़ा रहे हिंदू शिक्षक!’ इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग की तस्वीर ने खींचा ध्यान, 7 में 3 टीचर गैर-मुस्लिम

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भाषा को धर्म की सीमा से अलग देखने का संदेश

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UP News: इलाहाबाद विश्वविद्यालय का उर्दू विभाग अपनी विविधता के लिए चर्चा में है. विभाग के सात शिक्षकों में तीन हिंदू हैं, जो उर्दू भाषा और साहित्य पढ़ा रहे हैं. यह भाषाई और सांस्कृतिक एकता का एक प्रेरणादायक उदाहरण है.

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UP News: प्रयागराज स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय का उर्दू विभाग इन दिनों अपनी शिक्षकीय विविधता को लेकर चर्चा में है. विभाग में उर्दू भाषा और साहित्य पढ़ाने वाले कुल सात शिक्षकों में तीन हिंदू शिक्षक हैं. अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि से आने वाले ये शिक्षक विद्यार्थियों को उर्दू भाषा, साहित्य और उससे जुड़े विषयों की शिक्षा दे रहे हैं.

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सात शिक्षकों की टीम में तीन हिंदू

उर्दू विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर आशुतोष श्रीवास्तव और असिस्टेंट प्रोफेसर सूरज कुमार हिंदू हैं. वहीं डॉ. शहीद मलिक, डॉ. ताहिरा परवीन, डॉ. जफर उल्लाह अंसारी और डॉ. मोहम्मद कासिब मुस्लिम हैं. इस तरह विभाग में सात शिक्षकों की टीम अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि के साथ उर्दू की पढ़ाई करा रही है.

भाषा को धर्म की सीमा से अलग देखने का संदेश

विभाग की यह तस्वीर इस बात को सामने लाती है कि किसी भाषा का अध्ययन और अध्यापन केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं होता. हिंदू शिक्षक भी उर्दू भाषा और साहित्य की बारीकियों को विद्यार्थियों तक पहुंचा रहे हैं. कक्षाओं में भाषा के साथ साहित्य, इतिहास और सांस्कृतिक संदर्भों से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की जाती है.

प्रयागराज की साझा सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव

इलाहाबाद विश्वविद्यालय का उर्दू विभाग प्रयागराज की भाषायी और सांस्कृतिक विविधता की तस्वीर भी पेश करता है. उर्दू का विकास भारतीय भाषायी और साहित्यिक परंपराओं के साथ लंबे समय से जुड़ा रहा है. ऐसे में अलग-अलग पृष्ठभूमि के शिक्षकों का एक साथ इस विषय को पढ़ाना अकादमिक स्तर पर भी उल्लेखनीय है.

विद्यार्थियों के लिए भी खास अनुभव

विभाग में तीन हिंदू शिक्षकों की मौजूदगी विद्यार्थियों को उर्दू को धार्मिक पहचान के बजाय एक अकादमिक और साहित्यिक विषय के रूप में समझने का अवसर देती है. यहां विद्यार्थी भाषा के साथ उसके साहित्यिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पक्षों का अध्ययन करते हैं. विभाग की शिक्षकीय संरचना विश्वविद्यालय की भाषायी विविधता को भी सामने लाती है.


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