पिता को कागजों में ‘मार’ बेटे ने ले ली सरकारी नौकरी, उन्नाव में 13 साल बाद एक कागज ने खोल दिया आश्रित कोटे पूरा खेल
13 साल बाद जमीन के बैनामे ने खड़े किए बड़े सवाल
UP News: उन्नाव में शिक्षक की नौकरी का अनोखा मामला सामने आया है, जहां 2002 में मृत घोषित पिता के नाम पर 2003 में बेटे को नौकरी मिल गई. 13 साल बाद एक जमीन के बैनामे ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश किया है.
UP News: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में शिक्षक की नौकरी से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी अभिलेखों और मृतक आश्रित कोटे की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. असोहा ब्लॉक क्षेत्र के मंझरिया गांव निवासी शिक्षक श्रीराम यादव को वर्ष 2002 में सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित किया गया था. आरोप है कि इसके अगले वर्ष उनके छोटे बेटे रामबरन यादव ने खुद को मृतक आश्रित बताते हुए शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली. इसी आधार पर उनकी मां को पेंशन मिलने की बात भी सामने आई है.
पिता की मौत के रिकॉर्ड के बाद बेटे ने संभाली नौकरी
बताया गया है कि श्रीराम यादव वर्ष 2002 में नीमटीकर गांव के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के पद पर तैनात थे. आरोप के मुताबिक, वर्ष 2003 में उनके बेटे रामबरन यादव ने पिता की मृत्यु का हवाला देकर मृतक आश्रित कोटे के तहत सरकारी नौकरी हासिल कर ली. इसके बाद रामबरन परिवार के साथ लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में रहने लगे और उन्नाव में शिक्षक के रूप में नौकरी करते रहे. वर्ष 2004 में उनका तबादला असोहा से हिलौली ब्लॉक में हो गया.
13 साल बाद जमीन के बैनामे ने खड़े किए बड़े सवाल
रामबरन लंबे समय तक हिलौली ब्लॉक के अलग-अलग सरकारी स्कूलों में शिक्षक रहे. वर्तमान में वह खेरवा गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत बताए गए हैं. मामले में सबसे बड़ा सवाल तब उठा, जब वर्ष 2014-15 में श्रीराम यादव के नाम पर जमीन का बैनामा कराया गया. शिकायतकर्ताओं ने इसी दस्तावेज को आधार बनाकर सवाल उठाया कि यदि श्रीराम यादव की वर्ष 2002 में मृत्यु हो चुकी थी, तो 13 साल बाद उनके नाम पर जमीन का बैनामा कैसे हुआ.
21 साल बाद जमीन की विरासत पर भी सवाल
कोराना गांव के ललितेश सिंह समेत कुछ ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ ही शासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से की है. शिकायतकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में श्रीराम यादव वर्ष 2002 में मृत थे, तो वर्ष 2014-15 में उनके नाम पर जमीन का बैनामा और वर्ष 2023 में जमीन की विरासत कैसे दर्ज हुई. ग्रामीणों का दावा है कि रामबरन वर्ष 2002 के बाद गांव नहीं आए, जबकि उनके बड़े भाई देवेंद्र उर्फ गुड्डू यादव कभी-कभी गांव आते रहे.
अब तीन सदस्यीय टीम करेगी पूरे मामले की जांच
मामला सामने आने के बाद उन्नाव के बीएसए शैलेश कुमार पांडेय ने जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है. टीम में सहायक लेखाधिकारी सतीश पांडेय, बीईओ दीपेश और अनीता शाह को शामिल किया गया है. अधिकारियों को सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. बीएसए के मुताबिक, जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
आरटीआई से मांगी गई सेवा पुस्तिका
खंड शिक्षा अधिकारी हिलौली सुरेश कुमार ने बताया कि हाल में आरटीआई के माध्यम से श्रीराम यादव और रामबरन यादव की सेवा पुस्तिका मांगी गई थी, जिसे उपलब्ध करा दिया गया है. उनका कहना है कि यदि मामले में लिखित शिकायत प्राप्त होती है तो नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी. वहीं, आरोपित शिक्षक रामबरन यादव से उनका पक्ष जानने के लिए तीन बार मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया. फोन नहीं उठाया गया. व्हाट्सऐप पर भी जवाब मांगा गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.
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