राजा भइया के गढ़ में सजेगा आस्था का मंच, धीरेंद्र शास्त्री की रामकथा की तैयारी, कुंडा में जुट सकती है 2 लाख की भीड़
राजा भइया के परिवार की धार्मिक आयोजनों में रही है भूमिका
UP News:: प्रतापगढ़ के कुंडा में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की श्री रामकथा का आयोजन होने की प्रबल संभावना है. नवंबर में संभावित तीन दिवसीय कथा के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं. स्थानीय नेता राजा भइया के करीबी आयोजन स्थलों का निरीक्षण कर चुके हैं.
UP News: प्रतापगढ़ के कुंडा में इस साल नवंबर में बड़ा धार्मिक आयोजन होने की चर्चा तेज है. जानकारी के मुताबिक बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की श्री रामकथा यहां आयोजित कराने की तैयारी चल रही है. सूत्रों के अनुसार 17, 18 और 19 नवंबर को तीन दिवसीय कथा होने की संभावना है. हालांकि तारीख और कार्यक्रम को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
बेती राजमहल या बड़े मैदान पर नजर
प्रस्तावित कथा के लिए कुंडा के बेती स्थित राजमहल परिसर के अलावा किसी बड़े मैदान को संभावित आयोजन स्थल के तौर पर देखा जा रहा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक राजा भइया अपने करीबियों और शुभचिंतकों के साथ संभावित स्थल का निरीक्षण भी कर चुके हैं. इससे संकेत मिलता है कि कार्यक्रम को लेकर तैयारियां शुरुआती चर्चा से आगे बढ़ रही हैं.
धीरेंद्र शास्त्री की कथा में जुट सकती है बड़ी भीड़
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की रामकथा को लेकर कुंडा और आसपास के क्षेत्रों में लोगों की दिलचस्पी बताई जा रही है. अनुमान है कि आयोजन होने पर करीब दो लाख श्रद्धालु पहुंच सकते हैं. प्रतापगढ़ के साथ प्रयागराज और कौशांबी से भी बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना जताई जा रही है. इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासनिक और यातायात व्यवस्थाएं भी अहम होंगी.
राजा भइया के परिवार की धार्मिक आयोजनों में रही है भूमिका
राजा भइया पहले भी धार्मिक कार्यक्रमों से जुड़े आयोजनों में सक्रिय रहे हैं. उनके पिता राजा उदय प्रताप सिंह की भी धार्मिक गतिविधियों में रुचि रही है. ऐसे में कुंडा में प्रस्तावित रामकथा को लेकर स्थानीय स्तर पर उत्सुकता देखी जा रही है. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की लोकप्रियता को देखते हुए आयोजन के आकार को लेकर भी चर्चा है.
आयोजन को लेकर राजनीतिक चर्चा भी शुरू
प्रस्तावित धार्मिक कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी सामने आ रही हैं. कुछ राजनीतिक जानकार इसे राजा भइया की सार्वजनिक और धार्मिक गतिविधियों के संदर्भ में देख रहे हैं, जबकि फिलहाल आयोजन का घोषित उद्देश्य धार्मिक कार्यक्रम ही बताया जा रहा है. कार्यक्रम की तारीख, स्थान और व्यवस्थाओं की तस्वीर आधिकारिक घोषणा के बाद ही पूरी तरह साफ होगी.
17 से 19 नवंबर की तारीख पर अभी मुहर नहीं
सूत्रों के मुताबिक 17, 18 और 19 नवंबर की तारीखों पर विचार चल रहा है, लेकिन इन तारीखों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. बताया जा रहा है कि राजा भइया के करीबियों की ओर से बागेश्वर धाम से संपर्क किया गया है और कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी है. अब सभी की नजर जनसत्ता दल या आयोजकों की औपचारिक घोषणा पर है.
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