गोरखपुर में BJP का दांव: विपक्ष के 'सोशल इंजीनियरिंग' के जवाब में उतारे 10 ब्राह्मण चेहरे, समझें पूरी रणनीति

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विपक्ष के 'सोशल इंजीनियरिंग' के जवाब में उतारे 10 ब्राह्मण चेहरे

UP Politics: भारतीय जनता पार्टी ने गोरखपुर में अपनी नई क्षेत्रीय टीम की घोषणा की है, जिसमें 10 ब्राह्मण चेहरों को प्रमुखता दी गई है. यह कदम आगामी चुनावों के मद्देनजर विपक्ष के जातीय कार्ड का जवाब माना जा रहा है.

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UP Politics: भारतीय जनता पार्टी ने गोरखपुर में अपनी नई क्षेत्रीय टीम की घोषणा करके राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. प्रादेशिक नेतृत्व की स्वीकृति के बाद क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय द्वारा घोषित सैंतीस सदस्यीय इस कार्यकारिणी में आगामी चुनावों के मद्देनजर जातीय संतुलन साधने पर विशेष जोर दिया गया है. पार्टी ने इस बार दस प्रमुख ब्राह्मण चेहरों को अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपकर बड़ा दांव खेला है. इस रणनीतिक कदम को विपक्षी दलों के जातीय कार्ड का करारा जवाब माना जा रहा है.

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कायस्थ और पिछड़ों को भी मिला सम्मान

भाजपा की इस नवनिर्मित टीम में केवल ब्राह्मण ही नहीं, बल्कि चार प्रमुख कायस्थ कार्यकर्ताओं और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रभावशाली नेताओं को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया गया है. इस सामाजिक विस्तार के जरिए पार्टी ने हर वर्ग के मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने की ठोस योजना बनाई है. चार क्षेत्रीय महामंत्रियों के पदों में से दो पदों पर कायस्थ समाज के समर्पित नेताओं को जगह देकर संगठन ने सबको चौंका दिया है. इससे निष्ठावान कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है.

नए महामंत्रियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

संगठन में अनुभव और नए उत्साह का बेहतर तालमेल बिठाने के उद्देश्य से कई पुराने पदाधिकारियों को पदोन्नति भी दी गई है. पूर्व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष डॉक्टर सत्येंद्र सिन्हा को अब प्रोन्नत करके क्षेत्रीय महामंत्री की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है. उनके अलावा राहुल श्रीवास्तव तथा डॉक्टर बच्चा पांडेय नवीन को भी महामंत्री पद पर मनोनीत किया गया है. वहीं पिछड़ा वर्ग मोर्चा से जुड़े भास्कर निषाद को महामंत्री बनाकर भाजपा ने निचले स्तर पर अपनी पकड़ और मजबूत करने का संकेत दिया है.

गोरखपुर जिले का दिखा सबसे बड़ा दबदबा

इस पूरे क्षेत्रीय पुनर्गठन में गोरखपुर जिले का दबदबा स्पष्ट रूप से सामने आया है, जहां से सर्वाधिक आठ कार्यकर्ताओं को नई टीम में शामिल किया गया है. संगठन के इस पुनर्गठन से स्पष्ट होता है कि पार्टी आगामी विधानसभा और स्थानीय चुनावों के लिए किसी भी स्तर पर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है. संतुलित जातीय गणित और समर्पित कार्यकर्ताओं की फौज के साथ उतरी भाजपा की यह नई टीम राजनीतिक विरोधियों को हर मोर्चे पर कड़ी चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार दिखती है.

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