बार चुनाव रद्द करने से इलाहाबाद HC का इनकार, महिला वकीलों को 30% प्रतिनिधित्व जरूरी

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बार चुनाव रद्द करने से इलाहाबाद HC का इनकार

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UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुलंदशहर बार एसोसिएशन का चुनाव रद्द करने से मना कर दिया है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि भविष्य के सभी चुनावों में महिला वकीलों को कम से कम 30% प्रतिनिधित्व मिले. बार एसोसिएशन को एक महीने में नियमों में बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं.

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UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुलंदशहर सिविल बार एसोसिएशन का चुनाव रद्द करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि आगे होने वाले सभी चुनावों में महिला वकीलों को कम से कम 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देना होगा. इसके लिए बार एसोसिएशन को अपने नियमों में बदलाव करना होगा. कोर्ट ने यह काम एक महीने के अंदर पूरा करने को कहा है. यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने महिला अधिवक्ता भावना पंडित की याचिका पर दिया.

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महिला वकील ने चुनाव पर उठाए थे सवाल

महिला अधिवक्ता भावना पंडित ने 16 अप्रैल को हुए बार एसोसिएशन के चुनाव के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी में महिलाओं को 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. बुलंदशहर बार में 79 महिला मतदाता हैं, लेकिन चुनाव में कोई महिला पदाधिकारी नहीं बनी. याची ने चुनाव रद्द कर नए सिरे से 30 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व के साथ चुनाव कराने की मांग कोर्ट से की थी.

चुनाव के बाद चार महिलाओं को बनाया सदस्य

बार एसोसिएशन ने कोर्ट को बताया कि चुनाव की प्रक्रिया चार अप्रैल को शुरू हुई थी. उस समय किसी महिला वकील ने नामांकन दाखिल नहीं किया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए 20 अप्रैल को नई कार्यकारिणी ने चार महिला वकीलों को मनोनीत किया. निशा सिंह, अंजलि, रचना सोलंकी और शबाना मलिक को सह-कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया. बार एसोसिएशन के अनुसार इससे महिलाओं के लिए तय 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व पूरा हो गया था.

हाईकोर्ट ने चुनाव रद्द करना उचित नहीं माना

हाईकोर्ट ने कहा कि महिला वकीलों के मनोनयन की प्रक्रिया में तकनीकी कमी जरूर थी, क्योंकि प्रशासनिक न्यायाधीश की सहमति नहीं ली गई थी. लेकिन चुनाव में किसी महिला ने नामांकन ही नहीं किया था और बाद में चार महिलाओं को कार्यकारिणी में शामिल कर लिया गया. ऐसे में पूरा चुनाव रद्द करना सही नहीं होगा. कोर्ट ने बार एसोसिएशन को एक महीने में पूरी जानकारी प्रशासनिक न्यायाधीश को देने का निर्देश दिया है। तब तक मौजूदा कार्यकारिणी काम करती रहेगी.

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