18 दिन में दो मौतें, इस साल चौथी घटना, AMU में आखिर ऐसा क्या है जो खुदकुशी के लिए कर रहा मजबूर

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AMU में आखिर ऐसा क्या है जो अब बड़े सवाल खड़े कर रहा है

UP News: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) लगातार छात्रों की मौतों से जूझ रहा है। पिछले 18 दिनों में दो छात्रों की मौत ने परिसर में चिंता बढ़ा दी है, जो इस साल की चौथी घटना है। यह स्थिति छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और विश्वविद्यालय की सहायता प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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UP News: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में पिछले 18 दिनों के भीतर एक छात्रा और एक छात्र की मौत की घटनाओं ने विश्वविद्यालय समुदाय को चिंतित कर दिया है. इस साल विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों की आत्महत्या की यह चौथी घटना बताई जा रही है. लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव और समय रहते मदद उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं. विशेषज्ञों की नजर में ऐसे मामलों में शुरुआती संकेतों की पहचान और समय पर सहायता बेहद महत्वपूर्ण होती है.

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अगस्त में छात्रा की मौत के बाद फिर सामने आया मामला

अगस्त 2026 में दर्शनशास्त्र विषय में बीए द्वितीय वर्ष की 19 वर्षीय छात्रा इर्तिका समीर का शव आईजी हॉल के एक कमरे में मिला था. इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति और उनकी समस्याओं तक पहुंच बनाने को लेकर चर्चा तेज हुई. हाल की दूसरी घटना ने इन चिंताओं को और बढ़ा दिया है. विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां मामलों की परिस्थितियों की जांच कर रही हैं.

इस साल पहले भी सामने आए आत्महत्या के मामले

इससे पहले जनवरी 2026 में एएमयू से जुड़ी छात्रा इंतिहा फातिमा की आत्महत्या के प्रयास के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी. फरवरी 2026 में एबीके हाईस्कूल की कक्षा आठ की 14 वर्षीय छात्रा अदीबा तारिक की भी घर पर मौत हुई थी. पुलिस जांच में उस मामले में पारिवारिक तनाव की बात सामने आई थी. इससे पहले फरवरी 2025 में एमए थियोलॉजी प्रथम वर्ष के छात्र मोहम्मद शाकिर का शव परिसर स्थित हॉस्टल के कमरे के बाहर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था.

विश्वविद्यालय ने कहा, मदद पहुंचाने की व्यवस्था मौजूद

एएमयू के प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद के अनुसार, विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं अधिकारियों तक पहुंचाने की व्यवस्था उपलब्ध है. उनका कहना है कि यदि किसी छात्र या छात्रा के परेशान होने का संकेत मिलता है तो विश्वविद्यालय की ओर से उससे संपर्क कर उसकी बात सुनने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है. हालांकि, लगातार सामने आ रही घटनाओं ने इस व्यवस्था की पहुंच और शुरुआती स्तर पर परेशान विद्यार्थियों की पहचान को लेकर बहस तेज कर दी है.

समय रहते परेशानी पहचानने की चुनौती

लगातार घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विद्यार्थियों की मानसिक परेशानी को गंभीर रूप लेने से पहले पहचाना जा सकता है और उन्हें समय पर पर्याप्त मदद मिल सकती है. छात्रावासों, शिक्षकों, मित्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बेहतर संवाद तथा मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र को मजबूत करने की जरूरत पर चर्चा बढ़ रही है. यह घटनाएं केवल एक संस्थान की चिंता नहीं, बल्कि छात्र समुदाय के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की व्यापक आवश्यकता की ओर भी संकेत करती हैं.

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