आलोक रंजन हुए यूपी के 47वें मुख्य सचिव

।।राजेन्द्र कुमार।। लखनऊः इस बार के लोकसभा चुनावों में हुई हार से तिलमिलाए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को सूबे के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को हटा दिया. सरकार की योजनाओं को सूबे की जनता के बीच ठीक तरह से ना पहुंचा पाने के आरोप में उस्मानी के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है. उनके […]
।।राजेन्द्र कुमार।।
लखनऊः इस बार के लोकसभा चुनावों में हुई हार से तिलमिलाए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को सूबे के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को हटा दिया. सरकार की योजनाओं को सूबे की जनता के बीच ठीक तरह से ना पहुंचा पाने के आरोप में उस्मानी के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है. उनके स्थान पर 1978 बैच के आईएएस आलोक रंजन को मुख्य सचिव बनाया गया.
जो अभी कृषि उत्पादन आयुक्त और औद्योगित विकास आयुक्त सहित कई अन्य पदों का दायित्व संभाल रहे थे. यूपी के 47वें मुख्य सचिव का दायत्वि संभालने के तुरन्त बाद आलोक रंजन ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता सूबे का विकास है और इसमें आने वाली हर अड़चन को वह दूर करेंगे. आलोक रंजन की मंशा है कि सूबे को स्वच्छ प्रशासन मिले.
इसके लिए अच्छे अफसरों का मनोबल ऊंचा किया जाएगा और खराब कार्य करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी ताकि खराब कार्य करने वाले भय महसूस करें. उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनावों में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी की हुई करारी पराजय के बाद यह कहा जा रहा था कि सरकार की छवि को जनता के बीच ठीक से प्रस्तुत ना कर पाने की गांज सूबे की नौकरशाही पर जल्दी ही गिराई जाएगी. तमाम विभागों के अफसरों को और कई जिलों के डीएम तथा मंडलायुक्त आदि हटाएंगे जाएंगे. इन सारी चर्चाओं में सूबे के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को हटाए जाने की सुगबुगाहट किसी स्तर पर नहीं हुई. और शनिवार को सूबे के मुख्यमंत्री ने प्रदेश की नौकरशाही में फेरबदल करने की शुरूआत ही जावेद उस्मानी को हटाने से की. जबकि 23 मार्च 2012 को दिल्ली से बुलाकर उन्हें यूपी का मुख्य सचिव बनाया गया था.
मुख्यमंत्री सचिवालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार जावेद उस्मानी शांत स्वभाव के बेहद कर्मठ अधिकारी रहे हैं और उन्होंने सरकार की सभी विकास योजनाओं को लागू करने की पुख्ता रणनीति तैयार की पर वह योजनाओं का प्रचार प्रसार ठीक से नहीं करा सके. इसके अलावा उन्होंने सरकारी योजनाओं को लागू करने में सुस्ती बरतने वाले अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की और कानून व्यवस्था के प्रकरणों पर समय से कार्रवाई कराने में सफल नहीं हुए.
इनकी इन खामियों के चलते लोकसभा चुनावों में सरकार को नुकसान हुआ. इसी बीच जावेद उस्मानी ने भी केंद्र में जाने की कोशिश शुरू की. जिसकी भनक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को हुई तो उन्होंने जावेद उस्मानी को हटाने का निर्णय ले लिया. मुख्यमंत्री सचिवालय के अफसरों के अनुसार अभी कई अन्य बड़े अफसरों को हटाया जाएगा. मुख्यमंत्री सचिवालय में भी फेरबदल होगा. पुसिल महकमें में भी कई आईजी, डीआईजी तथा पुलिस कप्तान हटाए जाएंगे. जिन अफसरों को हटाया जाना है, उसकी सूची तैयार हो गई है. मुख्यमंत्री को उस पर आदेश करना है. एक सप्ताह के भीतर नौकरशाही में फेरबदल का कार्य पूरा होने का दावा मुख्यमंत्री से जुड़े अफसर कर रहे हैं.
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