सड़क पर निकलने से पहले पीयूसीसी और बीमा की कर लें जांच
एआइ जेनरेटेड
ओडिशा में ई-डिटेक्शन आधारित ई-चालान व्यवस्था लागू हो गई है. वाहन चालक सड़क पर निकलने से पहले अपने पीयूसीसी और बीमा की वैधता की जांच जरूर कर लें.
भुवनेश्वर: ओडिशा परिवहन विभाग ने वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी), वाहन बीमा और लंबित ई-चालान को लेकर ई-डिटेक्शन आधारित प्रवर्तन व्यवस्था लागू की है. यह व्यवस्था एक सितंबर से प्रभावी हो गयी है. विभाग की अधिसूचना के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत सड़कों पर चलने वाले वाहनों के पास वैध वैधानिक दस्तावेज, जिसमें पीयूसीसी और बीमा शामिल हैं, रखना अनिवार्य है. ई-डिटेक्शन प्रणाली के माध्यम से बिना वैध पीयूसीसी या बीमा के सड़क पर चलने वाले वाहनों की इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पहचान की जायेगी. उल्लंघन पाये जाने पर मोटर वाहन अधिनियम और निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन प्रक्रिया के तहत ई-चालान स्वतः जारी किया जायेगा. परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों को सलाह दी है कि वे सड़क पर वाहन चलाने से पहले अपने पीयूसीसी और बीमा की वैधता की जांच कर लें तथा जरूरत पड़ने पर उनका नवीनीकरण करा लें. अधिसूचना में केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 का भी उल्लेख किया गया है. इसके तहत निर्धारित अवधि से अधिक समय तक लंबित रहने वाले चालानों वाले वाहनों को संबंधित पोर्टल पर ‘नाट टू बी ट्रांजाक्टेड’ के रूप में चिह्नित किया जा सकता है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि नियम 167 के तहत पीयूसी परीक्षण को एक लेन-देन माना जाता है. इसके अनुसार, वाहन आधारित पीयूसी परीक्षण एप्लिकेशन में लंबित चालान और ‘नाट टू बी ट्रांजाक्टेड’ स्थिति की जांच की जायेगी. विभाग ने लंबित ई-चालान वाले वाहन मालिकों से निर्धारित समयसीमा के भीतर चालान का निपटारा करने की अपील की है.
पीयूसीसी की अधिकतम पेनल्टी 10 हजार से घटाकर 6000 की
ओडिशा सरकार ने पीयूसीसी के बिना चलने वाले वाहनों पर जुर्माना में बड़ी राहत देते हुए दो दिन पहले ही अधिकतम जुर्माना की राशि 10 हजार रुपये से घटाकर 6000 रुपये लागू कर दी है. संशोधित जुर्माना व्यवस्था 2019 से लागू प्रावधान की जगह प्रभावी होगी. नयी व्यवस्था के तहत वाहन के प्रकार और नियम उल्लंघन की पहली या दूसरी बार की स्थिति के आधार पर जुर्माने की राशि निर्धारित की गयी है. ओडिशा के परिवहन मंत्री विभूति भूषण जेना ने कहा था कि 2019 से बिना पीयूसीसी वाले वाहनों पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा था. लोगों पर वित्तीय बोझ कम करने के उद्देश्य से सरकार ने अब जुर्माना की राशि घटाने का निर्णय लिया है.
संशोधित नियमों के अनुसार, दोपहिया और तिपहिया वाहनों पर पहली बार उल्लंघन के लिए 1,000 रुपये और दूसरी बार उल्लंघन पर 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा. वहीं, मोटर कैब और जीप के लिए पहली बार उल्लंघन पर 2,000 रुपये तथा दूसरी बार 5,000 रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है. ट्रैक्टर और ट्रेलर के लिए भी यही जुर्माना व्यवस्था लागू होगी. अन्य श्रेणी के वाहनों के मामले में पहली और दूसरी बार के उल्लंघन पर 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा.
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