मुंबई के चेंबूर में केमिकल का टैंकर लीक, जानिए बेंजीन लीक होने पर कितना बड़ा खतरा था और कैसे टला हादसा

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घटनास्थल पर आपातकालीन टीम (Photo/X)

मुंबई के चेंबूर में बेंजीन से भरे टैंकर में रिसाव की घटना से हड़कंप मच गया. अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए 500 मीटर का इलाका घेरा और ट्रैफिक डायवर्ट किया, जिससे एक बड़े हादसे को टाल दिया गया.

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मुंबई के चेंबूर में सोमवार रात बेंजीन से भरे एक टैंकर में लीकेज की घटना से हड़कंप मच गया. टैंकर में करीब 28 टन बेंजीन था. रिसाव की सूचना रात करीब 8 बजे महुल रोड पर मैसूर कॉलोनी के पास मोनोरेल स्टेशन के नजदीक मिली. इसके बाद प्रशासन और आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं. फिलहाल अधिकारियों के मुताबिक घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है.

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500 मीटर का इलाका घेरा गया, ट्रैफिक डायवर्ट

बेंजीन के रिसाव को देखते हुए अधिकारियों ने घटनास्थल के आसपास करीब 500 मीटर का सुरक्षा घेरा बनाया.  रिपोर्ट के मुताबिक टैंकर से बेंजीन को दूसरे खाली टैंकर में ट्रांसफर किया गया. यह काम करीब रात 10:20 बजे पूरा हुआ. इसके बाद दोनों टैंकरों को BPCL रिफाइनरी परिसर ले जाया गया. वहीं, घटनास्थल पर सड़क को पानी से भी धोया गया.

बेंजीन कितना खतरनाक होता है?

बेंजीन एक रंगहीन तरल रसायन है जो तेजी से वाष्प में बदल सकता है और अत्यधिक ज्वलनशील होता है. यानी इसके वाष्प के संपर्क में आग या चिंगारी आने पर आग लगने का खतरा रहता है. बेंजीन के वाष्प को ज्यादा मात्रा में सांस के जरिए अंदर लेने पर सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी, भ्रम और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. CDC के मुताबिक बहुत ज्यादा मात्रा में संपर्क जानलेवा भी हो सकता है.

यही वजह है कि बेंजीन के टैंकर में रिसाव को सामान्य केमिकल लीकेज की तरह नहीं देखा जाता. रिसाव के बाद आसपास के लोगों को दूर रखना और आग के संभावित स्रोतों से क्षेत्र को सुरक्षित रखना अहम होता है.

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लंबे समय तक संपर्क से ब्लड कैंसर का खतरा

बेंजीन का स्वास्थ्य पर असर केवल तत्काल संपर्क तक सीमित नहीं है. ATSDR, जो अमेरिकी CDC का हिस्सा है, के मुताबिक लंबे समय तक बेंजीन के संपर्क में रहने से रक्त कोशिकाओं और बोन मैरो पर असर पड़ सकता है और इससे ल्यूकेमिया का खतरा बढ़ सकता है.

WHO की कैंसर रिसर्च एजेंसी IARC ने भी बेंजीन की कैंसर पैदा करने की क्षमता का मूल्यांकन किया है. IARC के अनुसार बेंजीन मानव के लिए कैंसरकारी पदार्थ है.

कैसे टला बड़ा हादसा?

चेंबूर में संभावित बड़ा हादसा होने से पहले प्रशासन ने कई जरूरी कदम उठाए. रिसाव की सूचना मिलने के बाद इलाके को घेरा गया, ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया और बेंजीन को प्रभावित टैंकर से दूसरे टैंकर में ट्रांसफर किया गया. ऑपरेशन पूरा होने के बाद टैंकरों को BPCL परिसर ले जाया गया.

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सबसे अहम बात यह रही कि अधिकारियों ने बेंजीन के रिसाव वाले क्षेत्र में लोगों और वाहनों की आवाजाही को सीमित किया. चूंकि बेंजीन अत्यधिक ज्वलनशील है और इसके वाष्प स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकते हैं, इसलिए सुरक्षा घेरा बनाना और संभावित आग के स्रोतों से दूरी बनाए रखना जरूरी था.

अब जांच का अहम सवाल यह है कि टैंकर से बेंजीन का रिसाव आखिर किस वजह से हुआ. अधिकारियों की जांच से यह स्पष्ट होगा कि इसके पीछे टैंकर में तकनीकी खराबी, वाल्व की समस्या या कोई दूसरी वजह थी.

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