पश्चिमी सिंहभूम की पदमा महतो बनीं आत्मनिर्भरता की अद्भुत मिसाल, धान की खेती से कर रहीं बंपर कमाई

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चक्रधरपुर के सिमिदीरी गांव की प्रगतिशील महिला किसान पदमा महतो (बीच में). फोटो: प्रभात खबर

चक्रधरपुर के सिमिदीरी गांव की प्रगतिशील महिला किसान पदमा महतो (बीच में). फोटो: प्रभात खबर

पश्चिमी सिंहभूम की पदमा महतो ने आधुनिक कृषि अपनाकर अपनी आय तीन गुना बढ़ाई। जानिए कैसे वैज्ञानिक खेती ने बदली उनकी और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति।

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Success Story: पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत सिमिदीरी पंचायत के सिमिदीरी गांव की प्रगतिशील महिला किसान पदमा महतो आज आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की बदौलत पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) के तहत मिले उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण ने उनकी खेती की तस्वीर बदल दी. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाने का साहस करें, तो खेती को लाभकारी और आत्मनिर्भर व्यवसाय बनाया जा सकता है.

करीब दो एकड़ कृषि भूमि की स्वामिनी

पदमा महतो वर्षों से खेती से जुड़ी रही हैं. पहले वे स्थानीय धान की पारंपरिक खेती करती थीं. खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी और उत्पादन कम होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो पा रही थी. एक वर्ष कम बारिश के चलते उनकी फसल प्रभावित हुई और उन्हें केवल 8 से 9 क्विंटल धान ही प्राप्त हुआ. उपज का बड़ा हिस्सा घर के उपयोग में चला जाता था और बिक्री से होने वाली आय बेहद सीमित रहती थी.

कृषि वैज्ञानिकों से लीं आधुनिक खेती की जानकारी

इस बीच चक्रधरपुर प्रखंड में कृषि विभाग द्वारा आयोजित जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिला. प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक खेती, उन्नत धान किस्मों, संतुलित उर्वरक उपयोग, खेत की तैयारी, समय पर रोपाई और आधुनिक फसल प्रबंधन की जानकारी दी. इन जानकारियों से प्रेरित होकर पदमा महतो ने पारंपरिक पद्धति छोड़कर आधुनिक तकनीक अपनाने का निर्णय लिया.

खाद्य सुरक्षा मिशन से मिला तकनीकी सहयोग

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत उन्हें सूखारोधी धान किस्म आईआर-64 डीआरटी का लगभग 40 किलोग्राम बीज, आवश्यक कृषि आदान और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया गया. कृषि विभाग के नियमित मार्गदर्शन में उन्होंने खेत की वैज्ञानिक तैयारी की, समय पर रोपाई की और संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाया.

धान की पैदावार में बढ़ोतरी के साथ बढ़ी कमाई

आधुनिक तकनीक का परिणाम बेहद उत्साहजनक रहा. जहां पहले उनके खेत से लगभग 9.25 क्विंटल धान का उत्पादन होता था, वहीं अब उत्पादन बढ़कर 28.80 क्विंटल तक पहुंच गया. धान बिक्री से होने वाली आय 18,500 रुपये से बढ़कर 57,600 रुपये हो गई. बेहतर प्रबंधन और नियंत्रित लागत के कारण उनकी शुद्ध बचत भी 5,400 रुपये से बढ़कर लगभग 41,700 रुपये तक पहुंच गई. यह परिवर्तन न केवल उनकी खेती बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ.

युवा किसानों की प्रेरणा बनीं पदमा महतो

अब पदमा महतो केवल सफल किसान नहीं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं और युवा किसानों को भी आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं. वे स्वयं सहायता समूह से जुड़कर कृषि नवाचारों का प्रचार-प्रसार कर रही हैं और विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अपने अनुभव साझा करती हैं.

क्या कहती हैं पदमा महतो?

पदमा महतो कहती हैं, “पहले हम परंपरागत तरीके से खेती करते थे, मेहनत ज्यादा होती थी और उत्पादन कम मिलता था. कृषि विभाग के प्रशिक्षण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन से मिले उन्नत बीज और तकनीकी मार्गदर्शन ने मेरी सोच बदल दी. अब खेती पहले से कहीं अधिक लाभदायक हो गई है. मेरी इच्छा है कि गांव की अधिक से अधिक महिलाएं और किसान आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं.”

क्या कहते हैं जिला कृषि पदाधिकारी?

जिला कृषि पदाधिकारी अमरजीत कुजूर ने बताया कि जिले में कृषि को लाभकारी बनाने के लिए किसानों तक वैज्ञानिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पदमा महतो जैसी महिला किसान इस बात का प्रमाण हैं कि सही मार्गदर्शन और योजनाओं के समुचित उपयोग से उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है. विभाग ऐसे सफल किसानों के अनुभवों को अन्य किसानों तक पहुंचाकर आधुनिक कृषि को जन-आंदोलन का रूप देने की दिशा में कार्य कर रहा है.

क्या कहते हैं उपायुक्त?

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम में कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए प्रशासन लगातार किसानों को आधुनिक तकनीकों, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से जोड़ रहा है. उन्होंने कहा कि पदमा महतो की सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाने के लिए आगे आएं, तो खेती आय का सशक्त माध्यम बन सकती है. जिला प्रशासन का प्रयास है कि जिले का प्रत्येक किसान योजनाओं का लाभ लेकर उत्पादन बढ़ाए, लागत घटाए और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए.

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खेती से आत्मनिर्भर बनीं पदमा

सिमिदीरी गांव की यह कहानी केवल एक महिला किसान की सफलता नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि वैज्ञानिक खेती, सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और सीखने की इच्छा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है. पदमा महतो पश्चिमी सिंहभूम की उन महिलाओं में शामिल हो चुकी हैं, जो खेती को सम्मानजनक और लाभकारी पेशा बनाकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को जमीन पर उतार रही हैं.

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शीन अनवर

लेखक के बारे में

By शीन अनवर

शीन अनवर वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक एवं स्नातकोत्तर तथा बी एड किया है. राजनीति, धर्म, शिक्षा के क्षेत्र में इन्होंने लंबा काम किया है. डिजिटल जर्नलिज्म में 5 साल का अनुभव है.

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