90% शौचालयों का नहीं हो रहा उपयोग

Updated at : 01 Nov 2016 6:21 AM (IST)
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90% शौचालयों का नहीं हो रहा उपयोग

चिरिया : खुले में शौचमुक्त पंचायत की उपाधि पर लगा सवालिया निशान ! शौचालय में स्टोर रूम, कबाड़खाना, मुर्गी व बकरियां रख रहे हैं ग्रामीण मनोहरपुर/चिरिया : स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूरे देश,राज्य व जिले में कार्यक्रमों का आयोजन लगातार जारी है. इसी क्रम में मनोहरपुर प्रखंड के चिरिया पंचायत को राज्य सरकार द्वारा […]

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चिरिया : खुले में शौचमुक्त पंचायत की उपाधि पर लगा सवालिया निशान !

शौचालय में स्टोर रूम, कबाड़खाना, मुर्गी व बकरियां रख रहे हैं ग्रामीण
मनोहरपुर/चिरिया : स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूरे देश,राज्य व जिले में कार्यक्रमों का आयोजन लगातार जारी है. इसी क्रम में मनोहरपुर प्रखंड के चिरिया पंचायत को राज्य सरकार द्वारा खुले में शौच मुक्त का दर्जा देते हुये पंचायत के मुखिया को पुरस्कृत भी किया गया. बावजूद इसके पंचायत के लोग खुले में शौच कर रहे है. इसका उदाहरण है निर्मल भारत अभियान के तहत बने शौचालय. पेयजल व स्वच्छता विभाग द्वारा उक्त पंचायत में 12-12 हजार रुपये की प्राक्कलित राशि से शौचालयों का निर्माण कराया गया था,जो लोगों के लिये उपयोग विहिन साबित हो रहा है. सरकार द्वारा बनवाये गये शौचालयों का इस्तेमाल ग्रामीण स्टोर रूम, कबाड़खाना,मुर्गी व बकरियों को रखने के लिये कर रहे हैं.
पंचायत के लोड़ो और बिनुवा गांव के 90 प्रतिशत शौचालय में बड़े-बड़े घासफूस उग गये हैं,जो इनकी अनुपयोगिता को प्रमाणित करता है. यहां के ग्रामीणों की मानसिकता में बदलाव लाने की आवश्यकता है.
स्वच्छ सवेरा कार्यक्रम भी ठंडे बस्ते में
विभिन्न विभाग के पदाधिकारी व कर्मचारियों के सहयोग से पंचायत के जनप्रतिनिधियों द्वारा पंचायत में स्वच्छ सवेरा कार्यक्रम की शुरूआत काफी अनोखे तरीके से शुरू की गयी थी, जिसके तहत सुबह-सुबह खुले में शौच करने वाले लोगों को माला पहनाकर उनका स्वागत करते हुये उनकी पृष्ठभूमि (शौचालय है अथवा नहीं) लेकर उन्हें चेतावनी देना था. इसी प्रकार दोबारा पकडे जाने पर दंड का प्रावधान था. लेकिन अभियान को चिरिया पंचायत में गंभीरता से लागू नहीं किया जा सका.
खुले में शौच के कारण मलेरिया व टाइफड जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ता है. डॉक्टरों के अनुसार सुबह में मलेरिया के मच्छरों का प्रकोप अधिक रहता है.म लेरिया जोन के रूप मे जाना जाने वाला यह प्रखंड कहीं ना कहीं यहां होने वाले बच्चों में कुपोषण का भी मुख्य कारक है. बहरहाल पंचायत के जनप्रतिनिधि व संबधित विभागीय अधिकारियों द्वारा यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि खुले में शौच मुक्त पंचायत की उपाधि वाले चिरिया पंचायत में शौचालयों की सौ फीसदी उपयोगिता हो सके.
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