तेलंगा खड़िया ने अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों को दी थी चुनौती : जोसिमा

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बघिमा में वीर शहीद तेलंगा खड़िया की 220वीं जयंती मनायी गयी

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सिमडेगा. पालकोट प्रखंड के बघिमा में वीर शहीद तेलंगा खड़िया की 220वीं जयंती मनायी गयी. मौके पर समिति के माथा खड़िया, अनुज खड़िया आदि के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में लोगों ने जल, जंगल, जमीन की रक्षा करने के संकल्प को दोहराया. मुख्य अतिथि जिप सदस्य जोसिमा खाखा उपस्थित थीं. उन्होंने शहीद तेलंगा खड़िया की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया. उन्होंने तेलंगा खड़िया के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि तेलंगा खड़िया केवल खड़िया समाज ही नहीं, पूरे झारखंड व देश के गौरव हैं. वह उन शुरुआती क्रांतिकारियों में से थे, जिन्होंने अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों को चुनौती दी और आदिवासियों के अधिकारों के लिए विद्रोह की नींव रखी. उन्होंने कहा कि विधायक भूषण बाड़ा ने बघिमा में शहीद की भव्य प्रतिमा स्थापित करवा कर इतिहास के पन्नों में दबे एक महानायक को वह सम्मान दिलाया है, जिसके वह हकदार थे. उन्होंने तेलंगा खड़िया के जीवन और उनके युद्ध कौशल पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 19वीं सदी के उस दौर में जब अंग्रेजों का अत्याचार चरम पर था, तब तेलंगा खड़िया ने गांव-गांव जाकर आदिवासियों को संगठित कर अंग्रेजों द्वारा थोपे गये कर और जमीन हड़पने की नीति का विरोध किया. युवाओं को तीर-धनुष व पारंपरिक हथियारों से युद्ध करने का प्रशिक्षण दिया. मौके पर जिप सदस्य समरोम पॉल तोपनो, प्रमुख बिपिन पंकज मिंज, प्रमुख सोनी लकड़ा, बसंत गुप्ता, मुखिया सुषमा केरकेट्टा, रोहित एक्का, निमरोध एक्का, पुरुषोत्तम उरांव, प्रतिमा कुजुर, उर्मिला केरकेट्टा उपस्थित थे.

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