सिमडेगा : सर्पदंश से 16 वर्षीय युवती की मौत, इलाज में देरी के आरोप पर बानो अस्पताल में हंगामा
बानो अस्पताल में मामले की जांच करते बीडीओ व अन्य अधिकारी | Prabhat Khabar Network
सिमडेगा के बानो में सर्पदंश से 16 वर्षीय युवती की मौत। परिजनों ने अस्पताल में इलाज में देरी और लापरवाही का आरोप लगाकर किया जमकर हंगामा।
सिमडेगा. बानो थाना क्षेत्र के झरिया डिपा गांव में सर्पदंश से 16 वर्षीय युवती अनिमा लुगुन की मौत हो गयी. मृतका प्यारा लुगुन की बेटी थी. घटना के बाद परिजनों ने बानो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज में कथित देरी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया. परिजन चिकित्सक मो. ताजुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
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रात तीन बजे अस्पताल लायी गयी थी युवती
परिजनों के अनुसार, बीती रात जहरीले सांप ने अनिमा को काट लिया था. इसके बाद उसे इलाज के लिए रात करीब तीन बजे बानो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के करीब दो घंटे बाद सुबह पांच बजे के आसपास इलाज शुरू किया गया. तब तक युवती की हालत गंभीर हो चुकी थी. इलाज के कुछ देर बाद चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया.
शव में हरकत महसूस होने का दावा
मृत्यु की पुष्टि के बाद पुलिस को सूचना दी गयी. बानो थाना पुलिस रविवार सुबह करीब सात बजे शव को थाना ले गयी. इसकी जानकारी मिलने पर मृतका के परिजन थाना परिसर पहुंचे और शव से लिपटकर रोने लगे. इसी दौरान परिजनों ने दावा किया कि उन्हें शव में कुछ हरकत महसूस हुई. इसके बाद आनन-फानन में युवती को दोबारा बानो अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने फिर से उसका इलाज शुरू किया. कुछ देर बाद चिकित्सक ने दोबारा करीब नौ बजे उसे मृत घोषित कर दिया.
पोस्टमार्टम कराने से किया इनकार
इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सिमडेगा सदर अस्पताल भेजा. सदर अस्पताल पहुंचने पर परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया. वे बानो अस्पताल में कथित लापरवाही बरतने वाले चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे. परिजन सिविल सर्जन को मौके पर बुलाने की मांग पर भी अड़े रहे.
प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे अस्पताल
घटना की जानकारी मिलने के बाद बानो के प्रखंड विकास पदाधिकारी समेत प्रशासनिक और पुलिस पदाधिकारी अस्पताल पहुंचे तथा मामले की छानबीन शुरू की. बानो अस्पताल में भी मृतका के परिजन जमे हुए हैं. परिजनों का कहना है कि इलाज में हुई कथित देरी की निष्पक्ष जांच करायी जाये और दोषी चिकित्सक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाये.
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आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं
हालांकि, इलाज में देरी और चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. प्रशासनिक जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
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