अबीर-गुलाल नहीं, अक्षरों के दीप से सरायकेला में मिटेगा अंधकार, निरक्षरों को साक्षर बनाने का अभियान शुरू
उल्लास साक्षरता पखवाड़ा के शुभारंभ में उपस्थित पदाधिकारी
सरायकेला-खरसावां जिले के सभी प्रखंडों में सोमवार से 'उल्लास साक्षरता पखवाड़ा' का भव्य शुभारंभ हो गया है. इसमें निरक्षरों को साक्षर बनाने पर जोर.
खरसावां/सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के सभी प्रखंडों में सोमवार से 'उल्लास साक्षरता पखवाड़ा' का भव्य शुभारंभ हो गया है. इस महाअभियान के तहत 15 वर्ष एवं इससे अधिक आयु के निरक्षर महिला-पुरुषों को 'उल्लास ऐप' के माध्यम से जोड़कर बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान में पारंगत किया जाएगा. यह प्रेरणादायक पखवाड़ा आगामी 14 सितंबर तक पूरे जिले में संचालित होगा.
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एनआर प्लस टू विद्यालय में हुआ विधिवत उद्घाटन
सरायकेला प्रखंड के मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय एनआर प्लस टू में जिला नोडल पदाधिकारी तरुण कुमार सिंह, बीपीओ पंकज महतो, विद्यालय के प्राचार्य वासुदेव राम एवं बीआरपी गौतम कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया. इस अवसर पर प्रखंड के सभी बीआरपी, सीआरपी, वीटी शिक्षक और प्रभारी शिक्षक विशेष रूप से उपस्थित रहे. कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ शिक्षक जयदेव चंद्र त्रिपाठी ने बेहद प्रभावी ढंग से किया.
तीन सितंबर तक चलेगा सघन पंजीकरण अभियान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला नोडल पदाधिकारी तरुण कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि उल्लास पखवाड़ा को लेकर तिथिवार रूपरेखा पहले ही तैयार कर ली गई है. जिले के सभी प्रखंडों में तीन सितंबर तक निरक्षर शिक्षार्थियों के सघन पंजीकरण का विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके लिए स्पष्ट प्रखंडवार लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं. इस पूरी प्रक्रिया की सतत निगरानी के लिए प्रत्येक प्रखंड में 'उल्लास सेल' का गठन किया गया है, जो जमीनी स्तर पर कार्य की मॉनिटरिंग कर रहा है.
वीटी के माध्यम से दी जाएगी बुनियादी शिक्षा

पंजीकरण प्रक्रिया संपन्न होने के बाद शिक्षार्थियों को उनके नजदीकी जनचेतना केंद्र में वॉलिंटियर टीचर्स (वीटी) के माध्यम से बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता के प्रति जन-जागृति फैलाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है.
ऑनलाइन परीक्षा के बाद मिलेगा साक्षरता प्रमाण पत्र
प्रशिक्षण का चरण पूरा होने के पश्चात शिक्षार्थियों की ऑनलाइन परीक्षा ली जाएगी. इस टेस्ट में सफलता प्राप्त करने वाले सभी शिक्षार्थियों को आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें विधिवत साक्षर के रूप में मान्यता मिलेगी. इस महत्वाकांक्षी अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के छूटे हुए वर्ग को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें साक्षर और सशक्त बनाना है.

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