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साहिबगंज में नापतौल के उपकरणों का नहीं हो रहा सत्यापन, ठगे जा रहे ग्राहक

साहिबगंज में रोजाना साप्ताहिक बाजार और हटिया लगाया जाता है. ऐसे में तराजू का बहुत बड़ा योगदान होता है. सभी दुकानदार तराजू का इस्तेमाल करते हैं. मैन्युअल तराजू का काम अब धीरे-धीरे कम होता जा रहा है और इस मैन्युअल के बदले इलेक्ट्रॉनिक तराजू का इस्तेमाल लोग कर रहे हैं.

साहिबगंज सामान चाहे जो भी खरीदना पड़ता है, वह बिना माप-तौल के नहीं होता है. चाहे तराजू से मापा जाये या फिर अन्य यंत्रों से. पर सब पर लगाम मापतौल विभाग का होता है. ऐसे में जब माप-तौल विभाग ही जिले में प्रभार पर चले तो निश्चित रूप से ऐसी हालत में दुकानदार चांदी काटे हैं. जानकारी के अनुसार पूरे संथाल परगना में मात्र एक मापतौल अधिकारी हैं यानी छह जिले में एक ही माप-तौल अधिकारी काम कर रहा है. अब यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक आदमी आखिर कौन-कौन सा जिला को संभाल पायेगा. पर इसकी खबर शायद ना सरकार को होगी ना जनप्रतिनिधि को. यदि जानकारी होती तो निश्चित रूप से कहीं ना कहीं पदाधिकारी का पदस्थापन होता. आये दिन अधिकारियों के पदस्थापन की सूची मीडिया में प्रकाशित होती रहती है. जबकि साहिबगंज जिला में बड़े-बड़े उद्योग धंधे भी है और सभी धंधों में माप-तौल की जरूरत है. ऐसे में माप-तौल अधिकारी का नियंत्रण नहीं हो तो निश्चित रूप से बड़े पैमाने पर चोरी की घटना घट रही है. जिससे ग्राहक ठगे जा रहे हैं. क्योंकि चोरी सिर्फ घरों के सामान या अन्य सामानों को इधर से उधर करना होता है. बल्कि चोरी तराजू से भी होती है. इसीलिए छोटे तराजू हो या धर्म कांटा सब में कुछ ना कुछ गड़बड़ी की शिकायत आये दिन मिलती रहती है.


इलेक्ट्रॉनिक तराजू के साथ छेड़छाड़ कर कम सामान देते हैं दुकानदार

मैन्युअल तराजू का काम अब धीरे-धीरे कम होता जा रहा है और इस मैन्युअल के बदले इलेक्ट्रॉनिक तराजू का इस्तेमाल लोग कर रहे हैं और इलेक्ट्रॉनिक तराजू पर लोगों का विश्वास भी है. पर चाल-बाज दुकानदारों में चोरी का एक फितरत होती है, जिसपर लगाम लगाना मुश्किल हो जाता है. सूत्रों की माने तो इलेक्ट्रॉनिक तराजू में भी छेड़छाड़ की सुविधा है और दुकानदार इलेक्ट्रॉनिक तराजू को छेड़छाड़ कर ग्राहकों को कम सामान देते हैं. इससे बड़ी चोरी हो रही है ऐसे चोरी पर भी लगाम लगाने की अति आवश्यकता है.

जिले में 47 धर्म कांटा है रजिस्टर्ड

सरकार नियम के प्रावधान के अनुसार जो भी बड़े कल कारखाने लगाए जाते हैं उसे मापतैल विभाग से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है ऐसी स्थिति में साहिबगंज जिला में पत्थर कारोबारी द्वारा 47 धर्म कांटा का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है जिसमें दो धर्म कांटा रेलवे विभाग का भी है एक बरहरवा में संचालित है और दूसरा साहिबगंज में इस रेलवे के धर्म कांटा के माध्यम से रेलवे रैक में लोड पत्थरों का मापी की जाती है, जबकि पूरे साहिबगंज जिला में पत्थर के कारोबारी की संख्या अनुमानित 200 से ऊपर होगा परंतु मात्र 47 धर्म कांटा के सहारे पत्थर का कारोबार टिका है.

क्या कहते हैं पदाधिकारी

साहिबगंज जिला माप-तौल अधिकारी प्रदीप कुमार का कहना है कि वह दुमका में पदस्थापित हूं. परंतु उनकी जिम्मेदारी में अतिरिक्त पांच जिले हैं. सभी जिले में मैं निश्चित रूप से समय निकालकर जाता हूं और कार्यालय का काम करता हूं. कई जगह से शिकायत मिलती है. परंतु व्यस्तता के कारण छापामारी नहीं हो पा रही है. बहुत जल्द शिकायतों का निबटारा भी किया जायेगा. साहिबगंज कार्यालय में कर्मचारियों की भारी कमी है. एक भी स्थाई कर्मचारी नहीं है, जिससे परेशानी हो रही है. इसके लिए सरकार को लिखा गया है.

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