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हिंदी शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूल, शैक्षणिक भविष्य पर संकट

Updated at : 13 Sep 2025 8:34 PM (IST)
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sahibganj

साहिबगंज (फाइल फोटो)

जिले के 88 उच्च विद्यालयों में हिंदी के हैं 57 टीजीटी व 5 पीजीटी शिक्षक

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साहिबगंज

जिले के 88 माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में हिंदी विषय के शिक्षकों की संख्या चिंताजनक रूप से कम है. छात्रों की संख्या के अनुपात में हिंदी भाषा के शिक्षकों की उपलब्धता अपर्याप्त है, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है. वर्ग दशम तक की पढ़ाई के लिए जिले को हिंदी विषय में कुल 93 टीजीटी शिक्षकों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 57 शिक्षक कार्यरत हैं. शेष 36 पद रिक्त हैं, जो शिक्षण गुणवत्ता में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं. इसी प्रकार, बारहवीं तक की पढ़ाई के लिए जिले को 16 पीजीटी हिंदी शिक्षकों की आवश्यकता है, परंतु वर्तमान में केवल 10 शिक्षक ही कार्यरत हैं और 6 पद रिक्त हैं. यह उल्लेखनीय है कि 2016 से पूर्व विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति की कोई व्यवस्था नहीं थी. 2016 के बाद इस प्रक्रिया की शुरुआत हुई, फिर भी जिले में भाषाई शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है. डीइओ डॉ दुर्गानंद झा ने जानकारी दी कि साहिबगंज जिले में हिंदी विषय के लिए स्वीकृत टीजीटी पदों की संख्या 93 है, जिनमें से 57 पदों पर शिक्षक कार्यरत हैं और 36 पद रिक्त हैं. वहीं, पीजीटी स्तर पर 16 स्वीकृत पदों में से 10 पर शिक्षक कार्यरत हैं और 6 पद रिक्त हैं. यह स्थिति हिंदी भाषा के शिक्षण को प्रभावित कर रही है. आवश्यकता है कि रिक्त पदों की शीघ्र पूर्ति की जाये, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और हिंदी भाषा के प्रति उनकी समझ और अभिरुचि विकसित हो सके.

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जिले के नौ प्रखंड में 544 स्कूल में एक-एक शिक्षक के भरोसे 27 हजार 621 बच्चों का भविष्य

फोटो नं 13 एसबीजी 46 है

कैप्सन – शनिवार को सुभाष कॉलोनी प्राथमिक विद्यालय

साहिबगंज. जिले में हिंदी शिक्षकों की कमी एक गंभीर शैक्षणिक संकट का संकेत देती है. जिले के नौ प्रखंडों में स्थित 544 विद्यालयों में एक-एक शिक्षक के भरोसे 27 हजार 621 बच्चों का भविष्य टिका हुआ है. यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के समग्र विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है. इन विद्यालयों में 472 प्राथमिक और 72 मध्य विद्यालय शामिल हैं, जहां एक शिक्षक को कक्षा एक से पांच और आठ तक के बच्चों को पढ़ाना पड़ता है. यह कार्यभार अत्यधिक है और व्यावहारिक रूप से असंभव प्रतीत होता है. शिक्षक को कभी गुरुगोष्ठी में भाग लेना होता है, कभी कार्यालय के कार्यों के लिए स्कूल से बाहर जाना पड़ता है, तो कभी मध्याह्न भोजन की कागजी प्रक्रिया पूरी करनी होती है. ऐसे में नियमित और प्रभावी शिक्षण कार्य बाधित होता है. ज्ञात हो कि साहिबगंज जिले में प्राथमिक स्तर पर 2176 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि एलिमेंटरी स्तर पर 397 शिक्षक हैं. मध्य और उच्च विद्यालयों की संख्या 3123 है, जिनमें शिक्षकों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है. कस्तूरबा गांधी और मॉडल स्कूलों में कुल 31 शिक्षक कार्यरत हैं. यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था के समक्ष एक चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाए जाने की आवश्यकता है. यदि शिक्षक संख्या में वृद्धि नहीं की गयी, तो आने वाली पीढ़ी के शैक्षणिक भविष्य पर गहरा असर पड़ सकता है.

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प्रखंड का नाम – एक शिक्षक – बच्चों की संख्या

बरहरवा 50 3774

बरहेट 87 3866

बोरियो 103 3047

मंडरो 58 1778

पतना 83 4145

राजमहल 40 2799

साहिबगंज 11 1006

तालझारी 76 2456

उधवा 36 4750

कुल 544 27621

क्या कहते हैं डीएसई

साहिबगंज. साहिबगंज जिले में शिक्षकों की कमी तो है अभी नये आचार्य शिक्षकों की नियुक्ति हुई है. उसमें से कुछ शिक्षक व उक्त स्कूल के बगल में जिस स्कूल में अधिक शिक्षक है उन्हें प्रतिनियुक्त की जायेगी.

कुमार हर्ष, डीएसई, साहिबगंज

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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