तालझारी में करमा पर्व की धूम, भाई की लंबी उम्र के लिए बहनों ने रखा व्रत
करमा पर्व की धूम. | Prabhat Khabar Network
तालझारी के सकरीगली समेत कई गांवों में करमा-धरमा पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया. बहनों ने भाई की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा और करम देव की पूजा की.
प्रतिनिधि, तालझारी: तालझारी प्रखंड के सकरीगली, दुधकोल, झरना टोला, बड़ातालबन्ना सहित आसपास के क्षेत्रों में मंगलवार देर शाम करमा-धरमा पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. पर्व को लेकर ग्रामीण इलाकों में खासा उत्साह देखने को मिला. बहनों ने अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखा और करम देव की पूजा-अर्चना की.
भाई की लंबी उम्र के लिए रखा व्रत
करमा पर्व के मौके पर बहनों ने भाई की दीर्घायु की कामना को लेकर उपवास रखा. पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ करम देव की पूजा की गयी.
मान्यता के अनुसार, करमा पर्व प्रकृति, फसल और वृक्षों की पूजा से जुड़ा है. अच्छी खरीफ फसल और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर भी इस पर्व पर पूजा-अर्चना की जाती है.
आंगन में गाड़ी गयी करम डाल
पर्व के दौरान करम वृक्ष की डाली को घर के आंगन में स्थापित किया गया. इसके बाद महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की.
पूजा के बाद ढोल और मांदर की थाप पर महिलाएं और ग्रामीण झूमते-नाचते नजर आये. पारंपरिक लोकगीत और नृत्य ने पर्व के माहौल को और रंगीन बना दिया.
सात दिनों तक चलती है पूजा की तैयारी
करमा पर्व की तैयारी कई दिन पहले से शुरू हो जाती है. स्थानीय परंपरा के अनुसार एकादशी से पहले सात दिनों तक पूजा-पाठ और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किये जाते हैं.
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाये जाने वाले इस पर्व में प्रकृति और करम वृक्ष के प्रति आस्था का विशेष महत्व है.
मंगलवार देर शाम पूजा-अर्चना के बाद बुधवार सुबह करम देव की विधिवत पूजा कर विसर्जन किया गया.
करमा पर्व के दौरान झारखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य की झलक देखने को मिलती है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व सामाजिक एकजुटता और प्रकृति के प्रति आस्था का भी प्रतीक माना जाता है.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए